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West Champaran: पश्चिमी चंपारण के इस गांव में बारिश बन जाती है आफत, नदी पार कर बेटे को कंधे पर लेकर निकला पिता

West Champaran: पश्चिमी चंपारण के इस गांव में बारिश बन जाती है आफत, नदी पार कर बेटे को कंधे पर लेकर निकला पिता

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड से विकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां कई गांव ऐसे हैं, जहां बारिश शुरू होते ही लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है। सड़क और पुल के अभाव में ग्रामीणों को उफनती नदियों को जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ता है। हाल ही में सामने आई एक तस्वीर, जिसमें एक पिता अपने बेटे को कंधे पर बैठाकर उफनती नदी पार करता दिखाई दे रहा है, पूरे क्षेत्र की बदहाल स्थिति को बयां कर रही है।

जानकारी के अनुसार, रामनगर प्रखंड की नौरंगिया दोन और बनकटवा करमहिया पंचायतों के दर्जनों गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इन गांवों में मुख्य रूप से थारू जनजाति और आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। बरसात के मौसम में यहां की कच्ची सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं और पहाड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क और पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। नदियों पर पुल नहीं होने के कारण लोगों को हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दौरान यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि एक पिता अपने बेटे को कंधे पर बैठाकर तेज बहाव वाली हारहा नदी पार कर रहा है। नदी का तेज बहाव और पानी का स्तर इस बात का अंदाजा देता है कि थोड़ी सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि हर बरसात में ग्रामीणों को इसी तरह की कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कई बार मरीजों को चारपाई या कंधे पर उठाकर नदी पार करानी पड़ती है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की जान पर भी बन आती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आजादी के दशकों बाद भी क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं। विकास कार्यों के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि क्षेत्र में सड़क और पुल का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि बरसात के मौसम में लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर न करना पड़े।

यह तस्वीर केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उन दर्जनों गांवों की वास्तविकता है, जहां हर वर्ष मानसून लोगों के लिए प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ आवागमन का भी बड़ा संकट बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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