West Bengal STF Raid: बंगाल में STF की कार्रवाई, 38 हथियार, 122 कारतूस और 1150 जिलेटिन स्टिक बरामद होने का दावा
पश्चिम बंगाल में पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अवैध हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी के विरुद्ध महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। राज्य के बीरभूम और पश्चिम बर्धमान जिलों में अलग-अलग अभियानों के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, अवैध बंदूकें और कारतूस बरामद किए हैं। इन कार्रवाइयों में अनेक लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। पुलिस के बयान के अनुसार, बीरभूम जिले में एक अवैध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान 1,150 जिलेटिन की छड़ें, 989 डेटोनेटर और करीब 12 हजार मीटर डेटोनेटिंग कॉर्ड बरामद किए गए। दूसरी ओर, जामुड़िया और पांडवेश्वर इलाके में चलाए गए अभियान के दौरान कुल 38 अवैध हथियार और 122 कारतूस जब्त किए गए हैं। इन बरामदगियों के बाद पुलिस अब हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की तलाश में जुट गई है।
पहली महत्वपूर्ण कार्रवाई बीरभूम जिले के मुरारई थाना क्षेत्र के बारोआ गोपालपुर गांव में की गई। स्पेशल टास्क फोर्स को खुफिया जानकारी मिली थी कि गांव में एक अवैध ठिकाने पर बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जमा की गई है। इसके उपरांत 4 और 5 नवंबर की मध्यरात्रि को STF की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान पुलिस को 1,150 जिलेटिन की छड़ें, 989 डेटोनेटर और लगभग 12 हजार मीटर डेटोनेटिंग कॉर्ड मिला। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद इलाके में सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी।
इस प्रकरण में पुलिस ने मोहम्मद रेजा शेख उर्फ गुड्डा और मुकेश सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान क्रमशः राजग्राम और सूरी के तिलपाड़ा इलाके के निवासियों के रूप में हुई है। पुलिस अब यह जानकारी जुटाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई थी और इसे किस उद्देश्य से जमा किया गया था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपियों के तार किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हुए हैं या नहीं। विस्फोटकों की बरामदगी की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल STF की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को भी जांच में शामिल किया गया है।
दूसरी कार्रवाई पश्चिम बर्धमान जिले के जामुड़िया और पांडवेश्वर इलाके में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले में की गई। STF काफी समय से इस नेटवर्क की जांच कर रही थी। पुलिस के बयान के अनुसार, इस प्रकरण में 31 जुलाई 2026 को जामुड़िया थाने में केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान खैरुल आलम चौधरी उर्फ गदाई को गिरफ्तार किया गया था। उसके कब्जे से दो अवैध हथियार बरामद हुए थे। पूछताछ और आगे की जांच के दौरान पुलिस को अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क के जरिए बिहार के मुंगेर से अवैध हथियार पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में पहुंचाए जा रहे थे।
इस प्रकरण में 4 अगस्त को झारखंड के रांची से मोहम्मद समशेर हुसैन को गिरफ्तार किया गया था। उसकी निशानदेही पर 9 अगस्त को अंडाल थाना क्षेत्र स्थित ईसीएल के एक परित्यक्त आवास से 15 अवैध बंदूकें, 57 कारतूस और दो खाली मैगजीन बरामद की गई थीं। इसके उपरांत 26 अक्टूबर को पांडवेश्वर थाना क्षेत्र के डालुरबाद से शेख शाहजहां उर्फ सजाहान को गिरफ्तार किया गया। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान मिली जानकारी को ध्यान में रखते हुए STF ने 3 और 5 नवंबर को पांडवेश्वर इलाके में लगातार तलाशी अभियान चलाया।
इस तलाशी अभियान के दौरान दक्षिण सामला कोलियरी के पास कृषि भूमि में छिपाकर रखे गए 21 अवैध हथियार बरामद किए गए। इनमें छह लंबी मस्कट बंदूकें, चार 7 एमएम पिस्तौल और 11 देसी पाइप गन शामिल हैं। साथ ही पुलिस ने 65 जिंदा कारतूस भी जब्त किए। पुलिस द्वारा दी गई मिली जानकारी के अनुसार, इस समूचे मामले में अब तक अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान कुल 38 अवैध आग्नेयास्त्र और 122 कारतूस बरामद किए जा चुके हैं। इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों में शेख शाहजहां उर्फ सजाहान का नाम भी सामने आया है, जिसे अवैध कोयला कारोबार से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों में शामिल बताया गया है।
STF अधिकारियों के अनुसार, हथियारों की बरामदगी के बाद अब यह जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है कि इनकी आपूर्ति किन लोगों को की जानी थी। पुलिस को आशंका है कि हथियारों की तस्करी के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसके तार पश्चिम बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर हथियारों के स्रोत, खरीदारों और उनके संभावित इस्तेमाल की जानकारी जुटा रही हैं। इसके अतिरिक्त उन ठिकानों की भी तलाश की जा रही है, जहां हथियारों और विस्फोटकों को छिपाकर रखा जा सकता है।
बीरभूम में विस्फोटकों की इतनी बड़ी खेप मिलने के बाद एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड भी सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री के स्रोत और उसके इस्तेमाल के उद्देश्य का पता लगाना प्राथमिकता है। यद्यपि, अभी तक किसी आतंकी साजिश की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही हैं कि विस्फोटकों का इस्तेमाल खनन, अवैध गतिविधियों या किसी अन्य आपराधिक उद्देश्य के लिए किया जाना था।
पुलिस की इन कार्रवाइयों ने पश्चिम बंगाल में सक्रिय अवैध हथियारों और विस्फोटकों के नेटवर्क के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन इलाकों में जांच तेज कर दी गई है, जहां अवैध कोयला कारोबार और हथियारों की तस्करी की गतिविधियों की आशंका जताई जाती रही है। वर्तमान में STF और स्थानीय पुलिस की टीमें दोनों मामलों में आगे की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और बरामद डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की पहचान की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी छापेमारी की जाएगी।





