Vivek Tiwari Case: लखनऊ कोर्ट ने प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना, संदीप कुमार बरी
लखनऊ। एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की मौत से जुड़े करीब आठ साल पुराने मामले में लखनऊ की जिला अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया, जबकि दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर बरी कर दिया।
अदालत ने प्रशांत चौधरी को हत्या की धारा 302 के बजाय गैर-इरादतन हत्या से संबंधित धारा 304 के तहत दोषी माना है। उनकी सजा पर अदालत अलग से सुनवाई करेगी।
मामला सितंबर 2018 में लखनऊ के गोमतीनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में हुई घटना से जुड़ा है। उस समय विवेक तिवारी एप्पल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर थे और घटना की रात अपनी सहकर्मी सना के साथ कार से लौट रहे थे।
मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास मोटरसाइकिल पर गश्त कर रहे सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने कथित तौर पर कार रोकने का संकेत दिया था। इसके बाद हुए घटनाक्रम में प्रशांत चौधरी की सर्विस पिस्टल से गोली चली।
गोली विवेक तिवारी को लगी और उनकी कार आगे जाकर डिवाइडर से टकरा गई। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के समय कार में मौजूद सना मामले की प्रमुख प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल रहीं।
घटना के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका और बल प्रयोग को लेकर सवाल उठे। दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच पूरी होने पर अदालत में चार्जशीट दाखिल हुई और लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली। अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के साथ फॉरेंसिक तथा अन्य साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए।
सना के अलावा विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी, पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों और जांच से जुड़े अधिकारियों समेत कई लोगों के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए।
कई वर्षों की सुनवाई के बाद अंतिम बहस पूरी हुई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा। 17 सितंबर 2026 को अदालत ने निर्णय सुनाते हुए प्रशांत चौधरी को धारा 304 के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने उन्हें धारा 302 के तहत हत्या का दोषी नहीं माना। संदीप कुमार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें बरी किया गया।
फैसले के बाद विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने असंतोष जताया और ऊपरी अदालत जाने की बात कही। परिवार की आपत्ति प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराए जाने और संदीप कुमार के बरी होने को लेकर है।
मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। प्रशांत चौधरी की सजा पर अदालत को फैसला करना बाकी है और परिवार ट्रायल कोर्ट के निर्णय को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कह चुका है।


