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उत्तर प्रदेश, नोएडा: नोएडा प्राधिकरण ने डीएनडी फ्लाईवे पर विज्ञापन के लिए मांगे 100 करोड़ रुपये, हाईकोर्ट ने शुल्क मांग पर लगाई रोक

उत्तर प्रदेश, नोएडा: नोएडा प्राधिकरण ने डीएनडी फ्लाईवे पर विज्ञापन के लिए मांगे 100 करोड़ रुपये, हाईकोर्ट ने शुल्क मांग पर लगाई रोक
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता को विज्ञापन प्रदर्शित करने का अधिकार है।

अजीत कुमार
उत्तर प्रदेश, नोएडा।दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली-नोएडा-दिल्ली (डीएनडी) फ्लाईवे की निर्माण एजेंसी नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (एनटीबीसीएल) से विज्ञापन लाइसेंस शुल्क के रूप में 100 करोड़ रुपये की मांग वाले नोएडा प्राधिकरण के मांग पत्र पर अंतरिम रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता को विज्ञापन प्रदर्शित करने का अधिकार है। पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश नहीं दिया जाता है, तो उसे अपूरणीय क्षति हो सकती है जिसकी आर्थिक रूप से भरपाई नहीं की जा सकती। पीठ ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। अंतरिम आदेश पारित करते हुए, अदालत ने नोएडा प्राधिकरण को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।
न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के आउटडोर विज्ञापन विभाग ने भी एक मांग पत्र जारी कर डीएनडी फ्लाईवे पर याचिकाकर्ता कंपनी द्वारा प्रदर्शित आउटडोर विज्ञापनों को हटाने का अनुरोध किया था। एनटीबीसीएल द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया था कि नोएडा प्राधिकरण ने उसे डीएनडी फ्लाईवे के नोएडा की ओर एक निश्चित दर पर आउटडोर विज्ञापन प्रदर्शित करने का अधिकार दिया था, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया और नियमित रूप से भुगतान किया गया।

यात्रियों से उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने पर लगी थी रोक

26 अक्टूबर, 2016 को, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को डीएनडी फ्लाईवे का उपयोग करने वाले यात्रियों से उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी थी। बाद में दिसंबर 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे बरकरार रखा। कंपनी ने दावा किया कि भले ही एनटीबीसीएल के पास अब टोल वसूलने का अधिकार नहीं है, फिर भी वह नोएडा की ओर विज्ञापन प्रदर्शित करने का हकदार है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के अधिकारों में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं किया है। इसमें यह भी कहा गया है कि 10 जनवरी को, नोएडा प्राधिकरण ने नियमों का उल्लंघन करते हुए, 1 अप्रैल, 2024 से प्रभावी, विज्ञापन के लिए लाइसेंस शुल्क में पूर्वव्यापी रूप से वृद्धि कर दी। इसके बाद, अब उसने ₹100 करोड़ की बकाया राशि की मांग की है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि फ्लाईवे के विकास के लिए दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जो नोएडा प्राधिकरण को विज्ञापन दरों में एकतरफा बदलाव करने की अनुमति देता हो।

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