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उत्तर प्रदेश : नई वित्तीय नीति, जनता के काम में सीधे खर्च हो रहा पैसा

Lucknow News : उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक स्पष्ट और व्यावहारिक बदलाव किया है। अब टैक्स को केवल राजस्व इकट्ठा करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे सीधे किसी खास उद्देश्य से जोड़कर खर्च किया जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो कौन सा पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, यह अब स्पष्ट दिख रहा है। यह मॉडल इसलिए खास है क्योंकि आम नागरिक अब आसानी से समझ सकता है कि उसका दिया हुआ टैक्स किस काम में लग रहा है। इस पूरी नीति का सीधा मतलब है कि टैक्स अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विकास का साधन बन चुका है। उत्तर प्रदेश ने दिखाया है कि अगर योजना स्पष्ट हो, तो हर रुपये का सही उपयोग करके समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है।

गो कल्याण सेस: छोटा टैक्स, बड़ा असर
राज्य सरकार ने आबकारी से जुड़े राजस्व पर 0.5% का गो कल्याण सेस लगाया है। यह टैक्स शराब की बिक्री से जुड़ा है। आम उपभोक्ता पर इसका बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन पूरे राज्य से यह मिलकर सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाता है। इस पैसे को सीधे आवारा गोवंश की देखभाल में खर्च किया जाता है। प्रदेश में बने गोवंश आश्रय स्थल में हजारों पशुओं को रहने, खाने और इलाज की सुविधा मिल रही है। दरअसल, कृषि में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की पशुओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ी। अब इस सेस के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया गया है।

हर सेक्टर का पैसा उसी सेक्टर में लग रहा
उत्तर प्रदेश ने एक और स्पष्ट नीति अपनाई है और वो ये कि जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर के विकास में उसका उपयोग किया जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें:

1. रियल एस्टेट: धार्मिक और पर्यटन विकास
संपत्ति की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट में किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ रहा है, रोजगार मिल रहा है और विरासत सुरक्षित हो रही है।

2. खनन: सिंचाई और पानी की व्यवस्था
खनन से मिलने वाला पैसा गांवों में सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने में लगाया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है।

3. एक्सप्रेसवे: गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी
पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल छोटी सड़कों (फीडर रोड) के निर्माण में खर्च हो रहा है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं।

4. मंडी शुल्क: किसानों की सुरक्षा
मंडी से मिलने वाली फीस का उपयोग फसल सुरक्षा और किसान योजनाओं में किया जा रहा है।

अब टैक्स का उपयोग साफ दिख रहा
इस नई नीति की सबसे बड़ी ताकत है, स्पष्टता। अब लोगों को साफ दिखता है कि शराब की बिक्री से मिला पैसा गो कल्याण में लग रहा है। टोल टैक्स का पैसा सड़क और कनेक्टिविटी में, प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा धार्मिक और पर्यटन विकास में निवेश हो रहा है। इससे सरकार पर भरोसा बढ़ता है, क्योंकि टैक्स अब “कहां गया” का सवाल नहीं, बल्कि “यहीं लगा” का जवाब देता है।

तेजी से विकास की मजबूत तैयारी
उत्तर प्रदेश का लक्ष्य है 2029-30 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार लगातार सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और खेती, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। राज्य के बजट में पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी तीनों में तेजी आ रही है।

दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण
उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है। मतलब साफ है कि जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वह उसी से मिलने वाले टैक्स को उसी क्षेत्र के विकास में लगा सकता है। जैसे, जहां पर्यटन ज्यादा है, वहां पर्यटन से मिलने वाले टैक्स को पर्यटन सुविधाएं बेहतर करने में खर्च किया जा सकता है। औद्योगिक राज्यों में उद्योगों से जुड़े शुल्क को पर्यावरण सुधार पर लगाया जा सकता है। वहीं कृषि प्रधान राज्यों में मंडी से मिलने वाली फीस को खेती और किसानों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, हर राज्य अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार टैक्स को विकास से जोड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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