Uttar Pradesh : हापुड़ में मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, दो किशोर मुक्त

Hapur : हापुड़ में मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। नगर कोतवाली पुलिस ने मासूम बच्चों का अपहरण कर उन्हें किसानों के हाथों बेचने वाले अंतरजनपदीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उनके कब्जे से दो अगवा किशोरों को सकुशल बरामद किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाता था और बाद में उन्हें अमरोहा, मुरादाबाद समेत विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को 10 से 12 हजार रुपये में बेच देता था। इन बच्चों से खेतों और घरों में मजदूरी कराई जाती थी।

मामले की शुरुआत 17 मई को हुई थी, जब हापुड़ शहर के शिवगढ़ी मोहल्ले निवासी सुंदर सिंह का 14 वर्षीय पुत्र वंश घर से निकला और रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो नगर कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और मुखबीर की सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ी तो एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ।

सोमवार कोतवाली नगर पुलिस ने रेलवे यार्ड रोड स्थित नीलकंठ मंदिर के पास छापेमारी कर गिरोह के चार सदस्यों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान योगेश उर्फ लोकेश निवासी गांव खेड़की भूड़, थाना गजरौला, अमरोहा, अमित गुप्ता निवासी हजरतनगर गढ़ी, संभल, दीपक निवासी चौका निकर नहरिया पुल, चारबाग, लखनऊ और मुकेश शर्मा निवासी थाना मझौला क्षेत्र, मुरादाबाद के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच हजार रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

पुलिस कार्रवाई के दौरान शिवगढ़ी निवासी 14 वर्षीय वंश और वाराणसी के लोहटा थाना क्षेत्र के गांव सबाईपुर निवासी पंकज 17 वर्ष को सकुशल बरामद कर लिया गया। दोनों किशोरों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर उनके परिजनों को सूचना दे दी गई है। बच्चों की बरामदगी के बाद परिवारों ने राहत की सांस ली।

पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गिरोह के सदस्य अमित गुप्ता और दीपक बच्चों तथा किशोरों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाते थे। इसके बाद उन्हें योगेश और मुकेश शर्मा के पास पहुंचाया जाता था। फिर इन बच्चों को अमरोहा, मुरादाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों को बेच दिया जाता था। किसानों से 10 से 12 हजार रुपये प्रति बच्चे की रकम ली जाती थी। खरीदे गए बच्चों से खेतों में मजदूरी, पशुओं की देखभाल और घरेलू काम करवाए जाते थे।

सीओ सिटी वरुण मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित मानव तस्करी गिरोह का मामला सामने आया है। गिरोह का नेटवर्क कई जिलों में सक्रिय था। पुलिस टीम अन्य फरार आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है। जल्द ही पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img