उत्तर प्रदेश : बुलंदशहर में वृक्षों पर चमगादड़ों का बसेरा, हजारों की संख्या में बने आकर्षण और किसान मित्र

Bulandshar News (अवनीश त्यागी) : बुलंदशहर में इन दिनों पेड़ों पर लटके हजारों चमगादड़ लोगों के लिए आकर्षण और कौतूहल का विषय बने हुए हैं। जनपद से गुजरने वाली गंगा नदी और नहरों के किनारे स्थित प्राचीन और ऊंचे वृक्ष इनका प्रमुख बसेरा बन गए हैं, जहां बड़ी संख्या में ये दिनभर लटके रहते हैं और शाम होते ही उड़ान भरते दिखाई देते हैं।

गांव मांकड़ी में नहर किनारे बरगद और जामुन के पेड़ों पर दस हजार से भी अधिक चमगादड़ों का डेरा है। इनकी मौजूदगी को देखने और उनकी अनोखी आवाज सुनने के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंच रहे हैं। आम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध फल पट्टी क्षेत्र स्याना में भी इनकी बड़ी संख्या देखी जा रही है, जिससे यह इलाका प्राकृतिक रूप से खास बन गया है।

डीएफओ डॉक्टर हरेंद्र सिंह के अनुसार चमगादड़ पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। वे हानिकारक कीट-पतंगों का भक्षण कर फसलों की रक्षा करते हैं और फलदार पौधों सहित अन्य वनस्पतियों में परागण का महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं। इसी वजह से इन्हें किसान मित्र और प्रकृति का संवाहक कहा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में चमगादड़ों की अहम भूमिका होती है। ये प्राकृतिक कीट नियंत्रक और महत्वपूर्ण परागणकर्ता होने के साथ वनों के पुनर्स्थापन में भी सहायक हैं। बड़ी मात्रा में कीटों का सेवन कर ये किसानों की कीटनाशकों पर होने वाली लागत को कम करते हैं। साथ ही चमगादड़ 700 से अधिक पौधों की प्रजातियों के परागण में योगदान देते हैं और वर्षावनों में बीजों के प्रसार के जरिए नई वनस्पति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे पर्यावरण को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

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