Court Verdict: सूरजपुर हत्याकांड में तीन भाइयों को उम्रकैद, चौथे आरोपी को चार साल की सजा
नोएडा। सूरजपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में हुए युवक की हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। मामले में अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी पाए गए तीन भाइयों को आजीवन कारावास और 35-35 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पाए गए चौथे आरोपी को चार वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
मामला वर्ष 2022 का है। पुलिस के अनुसार, पुरानी आपसी रंजिश और विवाद के चलते आरोपियों ने युवक को घेरकर उस पर घातक हथियारों से हमला किया था। हमले में युवक की मौत हो गई थी। घटना के बाद सूरजपुर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की पैरवी के आधार पर तीन आरोपियों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी माना गया। अदालत ने सुबोध पुत्र स्वर्गीय रामवीर सिंह, रवि पुत्र स्वर्गीय रामवीर सिंह और सागर पुत्र स्वर्गीय रामवीर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषी ग्राम पाली, थाना सूरजपुर, गौतमबुद्धनगर के रहने वाले हैं।
अदालत ने तीनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
वहीं, मामले में चौथे आरोपी मनीष पुत्र अजय प्रताप को भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने उसे चार वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मनीष भेंडापुर, थाना चांदीनगर, जिला बागपत का निवासी है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के अभियान ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप हुई है। पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल, सूरजपुर थाना पुलिस और अभियोजन इकाई ने मामले की लगातार निगरानी करते हुए अदालत में प्रभावी पैरवी की।
मामले में थाना सूरजपुर में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 137/2022, धारा 302 और 201 भारतीय दंड संहिता के तहत सुनवाई हुई। अदालत ने 26 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराकर सजा सुनाई।
पुलिस कमिश्नरेट की ओर से कहा गया है कि गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।


