Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Bulandshahr : खुर्जा के डाबर गांव में नकली पनीर की फैक्ट्री पर छापा, 10 क्विंटल माल सीजChandigarh : मेरे घर या अस्पताल से एक भी पैसा बरामद नहीं हुआ; 42 घंटे की रेड के बाद ईडी खाली हाथ लौटी- डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ाHapur News : हापुड़ में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना भी लगाHapur News : हापुड़ के उद्योगपति संजय गुप्ता का होगा राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में मिलेगा ग्लोबल आइकॉन अवार्डLucknow : जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी- सीएम योगीLucknow : पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय- मुख्यमंत्री योगीAyodhya : ‘पुष्पक विमान’ और ‘राम दरबार’ के साथ ही मोहित करेगी रामायण थीमLucknow : बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी योगी सरकार, 67.50 लाख लोगों को हर महीने मिल रही पेंशन

Supreme Court Noida: मुस्लिम धर्मगुरु पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को फटकार, गलत धाराओं में एफआईआर पर उठाए सवाल

Noida NCR News in Hindi

Supreme Court Noida: मुस्लिम धर्मगुरु पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को फटकार, गलत धाराओं में एफआईआर पर उठाए सवाल

नोएडा में मुस्लिम धर्मगुरु पर कथित हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यदि एफआईआर सही और प्रासंगिक कानूनी धाराओं में दर्ज ही नहीं की गई, तो जांच आगे कैसे बढ़ेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर देना, कानून के तहत उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज न करने का विकल्प नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करना, गलत या अधूरी एफआईआर की कमी को पूरा नहीं करता और इससे न्याय की प्रक्रिया बाधित होती है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली निवासी काज़ीम अहमद शेरवानी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में उनकी मुस्लिम पहचान के कारण एक समूह ने उन पर हमला किया था। उन्होंने अपनी याचिका में निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत दर्ज न करने या गलत धाराओं में मामला दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ैफ़ा अहमदी ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भले ही एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें हेट क्राइम से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की अहम धाराएं शामिल नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 153B और 295A जैसी गंभीर धाराएं, जो धर्म के आधार पर नफरत और दुश्मनी से जुड़े अपराधों पर लागू होती हैं, जानबूझकर एफआईआर में नहीं जोड़ी गईं।

इस पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि इन धाराओं के तहत संज्ञान लेने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 196 के अनुसार सरकारी मंजूरी आवश्यक होती है, लेकिन जब तक सही धाराओं में एफआईआर ही दर्ज नहीं होगी, तब तक मंजूरी और आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू कैसे होगी। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि सरकार किसी मामले में मंजूरी देने से इनकार कर सकती है, तो क्या इसका मतलब यह है कि एफआईआर दर्ज करने से भी इनकार किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि यह जांच अधिकारी की गलती थी और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या विभागीय कार्रवाई से एफआईआर में की गई कानूनी चूक दूर हो जाती है। अदालत ने कहा कि उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज किए बिना न तो जांच सही दिशा में जा सकती है और न ही कानूनी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

सुनवाई के दौरान एएसजी ने यह भी स्वीकार किया कि एफआईआर सही धाराओं में दर्ज की जानी चाहिए थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है ताकि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्देश लेकर अदालत के सामने पेश हो सके। हालांकि अदालत ने इस मामले को देशभर में हो रही घटनाओं से जोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक व्यक्तिगत मामला है और राष्ट्रीय स्तर पर कोई निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं हैं।

याचिका में बताया गया है कि 4 जुलाई 2021 को काज़ीम अहमद शेरवानी नोएडा से कार द्वारा अलीगढ़ जा रहे थे, तभी रास्ते में एक कथित ‘पेचकश गिरोह’ ने उन्हें रोककर हमला किया। आरोप है कि हमलावरों ने उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर मारपीट और दुर्व्यवहार किया। पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो घृणा अपराध की धाराओं में मामला दर्ज करने के बजाय पुलिस ने उन्हें ही परेशान किया। इसी को लेकर यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है, जहां अब राज्य सरकार की भूमिका और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मलाइका अरोड़ा ने अर्जुन कपूर के साथ ब्रेकअप की खबरों के बीच अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर की, कहा ‘हममें से हर किसी के पास सिर्फ़…’

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Tirthankar Sarkar

संबंधित खबरें