Sports City Layout: स्पोर्ट्स सिटी के लेआउट प्लान पर आई 225 से अधिक आपत्तियों का जल्द होगा निस्तारण, मोमनाथल गांव में भारी विरोध
नोएडा के बहुचर्चित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के विभिन्न भूखंडों के संशोधित लेआउट प्लान को लेकर प्राधिकरण स्तर पर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सेक्टर-78, 79, 150 और 152 में स्थित स्पोर्ट्स सिटी के विस्तृत भूखंडों के लेआउट प्लान को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने आम जनता और हितधारकों से 11 अक्तूबर तक आपत्तियां व सुझाव मांगे थे। इस समयावधि में प्राधिकरण के पास 225 से अधिक गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इन आपत्तियों की बिंदुवार समीक्षा और निस्तारण के लिए प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) वंदना त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति ने लगातार तीन दिनों तक आपत्ति दर्ज कराने वाले नागरिकों, फ्लैट खरीदारों और संबंधित बिल्डरों को सीधे प्राधिकरण मुख्यालय बुलाकर उनकी दलीलें सुनीं और संबंधित विभागों से तकनीकी रिपोर्ट तलब की है।
अधिकारियों का कहना है कि प्राधिकरण के योजना, विधि और सिविल विभागों से एक-दो दिन के भीतर आवश्यक जवाब समिति को प्राप्त हो जाएंगे। इसके तुरंत बाद आपत्तियों के निस्तारण की आधिकारिक प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्राधिकरण की योजना है कि इसी महीने प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इन सभी आपत्तियों का विधिक समाधान करते हुए स्पोर्ट्स सिटी के अंतिम लेआउट प्लान पर बोर्ड की मुहर लगा दी जाए। हालांकि एक तरफ जहां प्राधिकरण योजना को आगे बढ़ाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित गांवों के किसानों और स्थानीय निवासियों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है।
परियोजना के विरोध में बीती रात मोमनाथल गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर विशाल कैंडल मार्च निकाला और बिल्डरों व प्राधिकरण के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि संबंधित बिल्डर ने मिलीभगत करके एक भ्रामक और गलत लेआउट प्लान पेश किया है, जिसमें गांव की पुश्तैनी आबादी वाली जमीन को भी योजना का हिस्सा दिखा दिया गया है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि पिछले 15 वर्षों से राजस्व रिकॉर्ड और मौके पर दर्ज गांव के 12 मीटर चौड़े मुख्य आवागमन मार्ग को भी बिल्डर के लेआउट प्लान में समाहित कर लिया गया है। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनका पारंपरिक रास्ता और आबादी की जमीन लेआउट से बाहर नहीं की गई, तो वे किसी भी कीमत पर निर्माण कार्य नहीं होने देंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।


