SIR Update: 12 राज्यों के लिए चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों ने आदेशों को मंजूरी दी थी, सूत्रों का दावा
नई दिल्ली। Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर चल रही बहस के बीच सूत्रों के हवाले से नई जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक बिहार और असम समेत 12 राज्यों के लिए SIR से संबंधित आदेशों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर मंजूरी दी थी। बताया गया है कि तीनों सदस्यों की सहमति से यह फैसला लिया गया था।
यह दावा उस रिपोर्ट के बाद सामने आया है जिसमें SIR समेत कई विषयों पर आयोग के दो चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया और SIR को लेकर चर्चा तेज हुई। अब सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी में कहा जा रहा है कि संबंधित आदेशों को सभी सदस्यों की मंजूरी मिली थी।
सूत्रों के अनुसार बिहार के SIR आदेश, असम से जुड़ा आदेश, 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी आदेश तथा बाद में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित आदेशों को भी आयोग के तीनों सदस्यों ने मंजूरी दी थी। इस जानकारी के जरिए यह रेखांकित किया जा रहा है कि फैसले किसी एक सदस्य के स्तर पर नहीं लिए गए थे।
SIR से जुड़ी प्रक्रिया में Declaration Form का प्रावधान भी चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक मंजूर किए गए आदेशों में इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को शामिल किया गया था और नए मतदाताओं के पंजीकरण के समय इसे Form-6 के साथ जमा करने की व्यवस्था बताई गई है।
चुनाव आयोग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक इस व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और दस्तावेजी प्रक्रिया को सरल बनाना बताया गया है। आयोग ने कहा है कि SIR के दौरान Form-6 या Form-8 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र की व्यवस्था सर्वसम्मत मंजूरी के बाद लागू की गई थी।
आयोग ने SIR पर चर्चा के दौरान यह भी कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में सवाल, सुझाव, तकनीकी टिप्पणियां या आपत्तियां सामने आना आंतरिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। आयोग के अनुसार अलग-अलग सदस्यों की राय होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि अंतिम फैसला भी बंटा हुआ हो।
चुनाव आयोग ने अपने कामकाज को संविधान, संबंधित कानूनों और आयोग के निर्देशों के आधार पर संचालित होने की बात भी कही है। सूत्रों के मुताबिक मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत आगे बढ़ाई गई है।
फिलहाल SIR को लेकर सामने आई नई जानकारी का मुख्य बिंदु यही है कि बिहार और अन्य राज्यों से जुड़े प्रमुख आदेशों पर आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति थी। SIR की आगे की प्रक्रिया और इससे जुड़े प्रशासनिक तथा कानूनी घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।


