Sagar Liquor Tragedy: सागर शराब कांड में बढ़ता गया मौतों का आंकड़ा, कई लोग अस्पताल में भर्ती; अवैध शराब नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से जुड़ा मामला गंभीर बना हुआ है। घटना के बाद लगातार लोगों की मौत और बड़ी संख्या में मरीजों के अस्पताल पहुंचने से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने अवैध शराब तैयार करने और उसकी सप्लाई से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
मामला सागर जिले के बंडा और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा है। यहां संदिग्ध शराब का सेवन करने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई। प्रभावित लोगों को उल्टी, बेहोशी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बाद अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
शुरुआत में प्रभावित लोगों की संख्या सीमित बताई गई थी, लेकिन धीरे-धीरे अलग-अलग गांवों से मरीज अस्पताल पहुंचने लगे। गंभीर रूप से बीमार कुछ लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमें भेजीं। गांवों में ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिन्होंने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। लक्षण दिखाई देने वाले लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
पुलिस ने भी समानांतर रूप से अवैध शराब के नेटवर्क की जांच शुरू की। कई स्थानों पर दबिश देकर कथित तौर पर शराब तैयार करने, बेचने और सप्लाई करने से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया और गिरफ्तारियां की गईं।
जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शराब तैयार करने के लिए इस्तेमाल की गई स्पिरिट या अन्य सामग्री कहां से लाई गई थी। पुलिस सप्लाई चेन के हर स्तर की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध शराब कहां तैयार की जाती थी, उसकी पैकिंग किस स्थान पर होती थी और इसके बाद उसे किन गांवों या क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था।
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। मामले में कुछ आरोपियों के फरार होने की जानकारी भी सामने आई है, जिनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।
घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी जांच शुरू की गई है। मजिस्ट्रियल जांच के जरिए मौतों के वास्तविक कारण, शराब के स्रोत और प्रशासनिक स्तर पर संभावित लापरवाही जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सरकार की ओर से दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के बेहतर इलाज के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस के लिए अब पूरे नेटवर्क की वित्तीय और सप्लाई चेन का पता लगाना महत्वपूर्ण है। यह भी जांचा जा रहा है कि अवैध शराब का कारोबार कितने समय से चल रहा था और इसका दायरा किन क्षेत्रों तक फैला था।
जब्त सामग्री को भी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब में कौन से पदार्थ मौजूद थे और लोगों की मौत तथा तबीयत बिगड़ने का वास्तविक कारण क्या था।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक जांच दोनों जारी हैं। घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के कारोबार और उसकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच पूरी होने के बाद नेटवर्क की पूरी तस्वीर और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।


