PoK Protest: 25 हजार लोगों की भीड़ ने पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया, भारत से जुड़ने की मांग का दावा
मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच मंडहोल इलाके में एक बड़ी सभा आयोजित की गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में करीब 25 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सरदार अमन खान ने पाकिस्तान से आजादी, लाइन ऑफ कंट्रोल पर लगी बाड़ हटाने और पुंछ-मेंढर के रास्ते भारतीय जम्मू-कश्मीर से दोबारा जुड़ने की मांग उठाई। हालांकि, भीड़ की संख्या और प्रदर्शनकारियों की सभी मांगों के स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यह प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से चल रहे आंदोलन के बीच सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन का यह 110वां दिन था और मंडहोल गांव में आयोजित सभा LoC से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर हुई। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र की आर्थिक स्थिति, राशन आपूर्ति और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे।
सरदार अमन खान ने सभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि PoK में पिछले तीन महीनों से राशन की आपूर्ति प्रभावित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से सीमा क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और सामान की आवाजाही पर प्रतिबंधों के कारण स्थानीय आबादी को परेशानी हो रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार की ओर से PoK में एक अलग रुख सामने आया है और वहां जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत और समस्याओं के समाधान की बात भी कही है।
प्रदर्शन के दौरान अमन खान ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य पाकिस्तान के कथित नियंत्रण के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने LoC पर लगी बाड़ हटाकर पुंछ और मेंढर के रास्ते भारत से संपर्क बहाल करने की मांग रखी। उनके अनुसार आंदोलन में शामिल लोग क्षेत्र के भविष्य और अपने राजनीतिक अधिकारों को लेकर व्यापक बदलाव चाहते हैं। यह मांग आंदोलनकारी नेतृत्व का राजनीतिक रुख है।
PoK में चल रहे मौजूदा आंदोलनों की पृष्ठभूमि में आर्थिक समस्याएं, बिजली और गेहूं की कीमतें, शासन व्यवस्था तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी लंबे समय से सामने आते रहे हैं। इस साल क्षेत्र में अलग-अलग चरणों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं और कई बार सुरक्षा बलों की कार्रवाई तथा इंटरनेट और आवाजाही पर पाबंदियों की खबरें भी सामने आई हैं।
हालांकि हालिया मंडहोल सभा में भारत के साथ जुड़ने की मांग को विशेष रूप से प्रमुखता दी गई। प्रदर्शनकारियों की ओर से LoC की बाड़ को हटाने की मांग भी उठाई गई। आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के पारंपरिक संपर्क और आवागमन को प्रभावित किया है।
पाकिस्तान सरकार की ओर से PoK में जारी असंतोष पर अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। 23 सितंबर को मुजफ्फराबाद में ‘जीवे पाकिस्तान’ रैली के दौरान पाकिस्तान के कश्मीर मामलों के मंत्री इंजीनियर आमिर मुकाम ने प्रदर्शनकारी समूहों से लोगों के लिए मुश्किलें पैदा करने से बचने की अपील की थी और राजनीतिक मुद्दों को बातचीत तथा आपसी विचार-विमर्श के जरिए सुलझाने की बात कही थी।
PoK में विरोध की यह नई लहर ऐसे समय में दिखाई दे रही है जब क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक असंतोष को लेकर कई महीनों से प्रदर्शन जारी हैं। इससे पहले भी विभिन्न समूहों ने महंगाई, बिजली दरों, खाद्य आपूर्ति और शासन संबंधी मुद्दों को उठाया है। कुछ विरोध आंदोलनों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय प्रशासन से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।
मंडहोल में हुई सभा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा क्षेत्र में जारी आंदोलन के सामाजिक प्रभाव की ओर संकेत करता है, हालांकि भीड़ की वास्तविक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। प्रदर्शनकारियों की ओर से भारत से जुड़ने का मुद्दा उठाए जाने से इस आंदोलन को एक अलग राजनीतिक आयाम भी मिला है।
फिलहाल PoK में विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बीच प्रशासन और आंदोलनकारी समूहों के बीच टकराव तथा बातचीत दोनों की स्थितियां बनी हुई हैं। आगे आंदोलनकारी संगठनों की रणनीति, पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।


