Omaxe Mall Noida: 127 खरीदार पहुंचे NCLT, किराया बंद करने और रजिस्ट्री न कराने का आरोप

Omaxe Mall Noida: 127 खरीदार पहुंचे NCLT, किराया बंद करने और रजिस्ट्री न कराने का आरोप

नोएडा। सेक्टर बीटा-2 स्थित ओमेक्स मॉल परियोजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। मॉल में दुकानें खरीदने वाले 127 खरीदारों ने बिल्डर प्रबंधन के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) का दरवाजा खटखटाया है। खरीदारों का आरोप है कि बिल्डर ने दुकानों को लीज पर लेकर किराया देने का वादा किया था, लेकिन पिछले एक वर्ष से भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। साथ ही दुकानों की रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई और लेआउट में बदलाव कर दिया गया।

खरीदार शाहबाज खान ने बताया कि करीब सात साल पहले कई निवेशकों ने ओमेक्स मॉल में लगभग 40 लाख रुपये प्रति दुकान की दर से निवेश किया था। उस समय बिल्डर प्रबंधन ने आश्वासन दिया था कि जब तक किसी बड़े ब्रांड को दुकानें लीज पर नहीं दी जातीं, तब तक कंपनी स्वयं दुकानों को लीज पर लेकर नियमित मासिक किराया देती रहेगी। शुरुआती वर्षों में किराया दिया भी गया, जिससे निवेशकों को भरोसा बना रहा।

हालांकि खरीदारों का कहना है कि पिछले एक साल से बिल्डर ने अचानक किराया देना बंद कर दिया। जब इस संबंध में प्रबंधन से संपर्क किया गया तो कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं मिला। खरीदार राकेश ने बताया कि अब निवेशकों को अपनी फंसी हुई पूंजी की चिंता सता रही है। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत या लोन लेकर दुकानें खरीदी थीं, लेकिन अब न किराया मिल रहा है और न ही संपत्ति पर पूर्ण अधिकार।

खरीदारों ने यह भी आरोप लगाया है कि अब तक दुकानों की विधिवत रजिस्ट्री नहीं कराई गई है। शाहबाज खान और अंकुर सहित अन्य आवंटियों का कहना है कि परियोजना के मूल लेआउट में भी बदलाव कर दिया गया, जिससे उन्हें दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आया है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मौके पर अभी तक कई दुकानों का निर्माण ही नहीं हुआ है, जिससे परियोजना की प्रगति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए 127 खरीदारों ने सामूहिक रूप से एनसीएलटी में वाद दायर किया है। उनका उद्देश्य बिल्डर प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए अपने निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। खरीदारों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो अन्य निवेशक भी कानूनी रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में इस प्रकार के मामलों में एनसीएलटी का रुख सख्त रहता है, खासकर तब जब निवेशकों को समय पर भुगतान नहीं किया जाता या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन होता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि न्यायाधिकरण इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या खरीदारों को राहत मिल पाती है।

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