Export Growth News: डील के हफ्ते बाद ही 23 प्रतिशत बढ़ी निर्यात दर

Export Growth News: डील के हफ्ते बाद ही 23 प्रतिशत बढ़ी निर्यात दर

Noida। भारत और यूरोपीय देशों के बीच हुए व्यापार समझौते के साथ-साथ अमेरिका द्वारा टैरिफ में की गई कमी का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। समझौते के महज एक सप्ताह के भीतर ही जिले से होने वाले निर्यात में करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निर्यातकों का कहना है कि विदेशी बाजारों से ऑर्डर बढ़ने लगे हैं और विशेष रूप से कृत्रिम रेशे (मैन मेड फाइबर) से बने वस्त्रों की मांग में तेजी आई है।

निर्यातकों के अनुसार, कृत्रिम रेशे वाले कपड़े टिकाऊ, हल्के और कम लागत वाले होने के कारण वैश्विक बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यूरोप और अमेरिका में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। हालिया व्यापारिक राहत के बाद खरीदारों ने भारतीय उत्पादकों से दोबारा संपर्क शुरू कर दिया है, जिससे उद्योग में उत्साह का माहौल है।

अपैरल पार्क क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने बताया कि शहर की लगभग चार हजार निर्यात इकाइयों में से करीब 400 इकाइयां मैन मेड फाइबर आधारित वस्त्रों का उत्पादन करती हैं। इन इकाइयों का सालाना कारोबार करीब हजार करोड़ रुपये के आसपास है। उनका कहना है कि ऑर्डर बढ़ने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी और इसके साथ ही श्रमिकों की मांग भी बढ़ेगी। अनुमान है कि आने वाले महीनों में श्रमिकों की संख्या डेढ़ लाख से बढ़कर दो लाख तक पहुंच सकती है।

Indian Industries Association के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल ने बताया कि विश्व बाजार में लगभग 70 प्रतिशत मांग कृत्रिम रेशे युक्त वस्त्रों की है, जबकि 30 प्रतिशत मांग कॉटन वस्त्रों की रहती है। इसके विपरीत शहर से होने वाले निर्यात में 70 प्रतिशत हिस्सा कॉटन और 30 प्रतिशत मैन मेड फाइबर उत्पादों का है। उनका मानना है कि बाजार की मांग को देखते हुए स्थानीय उद्योग को अपने उत्पादन संतुलन में बदलाव करना होगा।

बंसल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की Production Linked Incentive Scheme के तहत कृत्रिम रेशे आधारित वस्त्र इकाइयों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे निवेश और उत्पादन दोनों को गति मिलने की उम्मीद है। उनका दावा है कि हालिया अंतरराष्ट्रीय डील के बाद निर्यातकों को लगातार विदेशी खरीदारों के कॉल आ रहे हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस अवसर का सही उपयोग किया गया तो नोएडा का टेक्सटाइल सेक्टर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। हालांकि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, बिजली आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स ढांचे को और मजबूत करना होगा।

व्यापार समझौतों के सकारात्मक प्रभाव से स्थानीय उद्योग में नई ऊर्जा आई है। निर्यात में आई 23 प्रतिशत की वृद्धि को उद्योग जगत एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है, जो आने वाले समय में रोजगार और निवेश दोनों को बढ़ावा दे सकता है।

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