Noida Durga Puja: नोएडा में थाई मंदिरों की वास्तुकला की तर्ज पर तैयार होगा दुर्गा पूजा पंडाल
नोएडा। सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार में इस बार दुर्गा पूजा समारोह के दौरान श्रद्धालुओं को थाईलैंड के भव्य मंदिरों की वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी। जलवायु विहार सांस्कृतिक कल्याण समिति की ओर से 16 से 21 अक्टूबर तक 34वें दुर्गा पूजा समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस बार पूजा पंडाल को थाई मंदिरों की वास्तुकला से प्रेरित रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें बंगाल की पारंपरिक धार्मिक संस्कृति के साथ दक्षिण-पूर्व एशिया की कला और स्थापत्य शैली का मेल देखने को मिलेगा।
पंडाल का निर्माण कोलकाता से आए करीब 30 कारीगर कर रहे हैं। इसके ढांचे को तैयार करने में 1500 से अधिक बांस का इस्तेमाल किया जाएगा। कारीगर पंडाल की संरचना और सजावट पर बारीकी से काम कर रहे हैं, ताकि तैयार होने के बाद श्रद्धालुओं को थाई मंदिरों जैसी भव्यता का अनुभव कराया जा सके।
आयोजकों के अनुसार, पूजा पंडाल करीब 45 फीट ऊंचा और 60 फीट लंबा होगा। इसके अंदरूनी हिस्से की गहराई करीब 70 फीट रखी जाएगी। पंडाल के आंतरिक हिस्से को थाई मंदिरों की वास्तुकला से प्रेरित सजावट के साथ तैयार किया जाएगा। इसकी डिजाइन में धार्मिक भावनाओं के साथ वास्तुकला और कलात्मक सजावट का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
समिति के मुताबिक, इस आयोजन का उद्देश्य केवल थाई मंदिर की प्रतिकृति तैयार करना नहीं है, बल्कि बंगाल की पारंपरिक दुर्गा पूजा और दक्षिण-पूर्व एशिया की कला एवं संस्कृति को एक साथ प्रस्तुत करना है। पंडाल की सजावट, संरचना और प्रतिमा के स्वरूप में भी इसी थीम को ध्यान में रखते हुए सामंजस्य स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
पंडाल के अंदर मां दुर्गा की करीब 12 फीट ऊंची और 15 फीट लंबी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा की भव्यता के साथ पंडाल की सजावट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि दोनों एक-दूसरे के अनुरूप दिखाई दें। पूजा समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन स्थल पर तैयारियां भी की जा रही हैं।
समिति की सदस्य जया डे ने बताया कि आयोजन समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को पंडाल में प्रवेश करते ही भव्यता के साथ आध्यात्मिक और शांत वातावरण का अनुभव हो। इसके लिए पंडाल की वास्तुकला, सजावट और प्रतिमा के स्वरूप पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जलवायु विहार में आयोजित होने वाला यह 34वां दुर्गा पूजा समारोह बंगाली समुदाय की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख हिस्सा है। इस बार थाई मंदिरों की वास्तुकला को थीम बनाने से पूजा पंडाल में भारतीय धार्मिक परंपरा के साथ एक अलग सांस्कृतिक और स्थापत्य अनुभव देखने को मिलेगा।


