Noida Bull Attack: नोएडा में आवारा सांडों का खूनी आतंक, दो अलग-अलग हमलों में एक की मौत, दूसरा गंभीर घायल
नोएडा। शहर की सड़कों पर आवारा सांडों का बढ़ता आतंक अब जानलेवा साबित होने लगा है। अलग-अलग सेक्टरों में हुई दो गंभीर घटनाओं ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। नोएडा के सेक्टर-2 में एक 44 वर्षीय व्यक्ति की सांड के हमले में दर्दनाक मौत हो गई, जबकि सेक्टर-4 में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से नागरिकों में भय और आक्रोश दोनों गहराते जा रहे हैं।
पहली घटना सेक्टर-2 की है। जानकारी के मुताबिक 44 वर्षीय सेवेंद्र कुमार साइकिल से अपने काम पर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक आवारा सांड ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह कई फीट दूर जाकर सड़क पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पूरी वारदात पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें सांड का हमला बेहद भयावह नजर आ रहा है।
दूसरी घटना सेक्टर-4 में सामने आई, जहां एक ग्राफिक्स डिजाइनर अपने कार्यालय के बाहर खड़ा था। अचानक एक सांड ने उस पर हमला कर दिया। युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह सांड को भगाया और घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
इन दो घटनाओं ने शहर में आवारा पशुओं की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुख्य सड़कों से लेकर आवासीय गलियों तक सांडों का झुंड खुलेआम घूमता है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई और आश्वासन तक सीमित है।
शहर में संचालित गौशालाओं की स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था कागजों तक सीमित नजर आती है, जबकि हकीकत में आवारा सांड सड़क पर आम लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सांडों के हमले से किसी की जान गई हो या लोग घायल हुए हों। इससे पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार ठोस नीति या प्रभावी अभियान की कमी महसूस की गई। अब इन ताजा घटनाओं के बाद लोगों की मांग है कि नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन तत्काल व्यापक अभियान चलाकर सड़कों से आवारा सांडों को हटाए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
शहरवासी सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक लोग सड़कों पर यूं ही अपनी जान जोखिम में डालकर निकलते रहेंगे। अब प्रशासन के सामने चुनौती साफ है—या तो ठोस कार्रवाई करे, या फिर बढ़ते आक्रोश का सामना करने के लिए तैयार रहे।


