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New Delhi : प्रदूषण पर दिल्ली सरकार की सख्ती, ‘एक्शन प्लान-2026’ लागू

New Delhi : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में वायु प्रदूषण के खिलाफ व्यापक अभियान की शुरुआत करते हुए एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन एक्शन प्लान-2026 लागू करने की घोषणा की। ग्रीन बजट 2026-27 के बाद तैयार इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ, हरित और सतत शहरी विकास को जमीन पर उतारना है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जनसेवा सदन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित विभागों और एजेंसियों के अधिकारियों ने भाग लिया और योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा की गई।

यह एक्शन प्लान वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरा या बायोमास जलाने जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों पर विशेष ध्यान दिया गया है। 11 प्रमुख क्षेत्रों में विभागों के बीच समन्वय के साथ समयबद्ध कार्य योजना लागू की जाएगी और इसकी रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ‘नो पीयूसी-नो फ्यूल’ नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके तहत बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा और निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरे लगाए जा रहे हैं। एक नवंबर 2026 से बीएस-VI, सीएनजी या इलेक्ट्रिक मानकों को पूरा नहीं करने वाले मालवाहक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम, दफ्तरों के समय में बदलाव और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अतिरिक्त प्रतिबंध जैसे कदम भी लागू किए जा सकते हैं।

सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकार ने वर्ष 2028-29 तक बसों की संख्या 13,760 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों पर विशेष जोर होगा। मेट्रो और आरआरटीएस नेटवर्क के साथ फीडर सेवाओं को जोड़कर अंतिम मील कनेक्टिविटी बेहतर की जाएगी। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए अगले चार वर्षों में 32,000 ईवी चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे और नई ईवी नीति में दोपहिया व वाणिज्यिक वाहनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शहर में जाम की समस्या कम करने के लिए 62 प्रमुख हॉटस्पॉट की पहचान कर सुधार कार्य किए जा रहे हैं। इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, स्मार्ट पार्किंग और बेहतर सड़क उपयोग के जरिए अनावश्यक उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य है।

धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर वाटर स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इनकी निगरानी जीपीएस आधारित केंद्रीय डैशबोर्ड से की जाएगी। साथ ही लगभग 3,500 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास, हरित पट्टी और यूटिलिटी डक्ट जैसी सुविधाओं के जरिए दीर्घकालिक समाधान पर काम किया जा रहा है। निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए एआई आधारित सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम ट्रैकिंग और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

कचरा प्रबंधन के तहत पुराने लैंडफिल को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है। ओखला को जुलाई 2026, भलस्वा को दिसंबर 2026 और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक समाप्त किया जाएगा। बायोमास जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है और इसके विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सभी इकाइयों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली अनिवार्य की गई है। मानकों का पालन न करने वाले उद्योगों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक होने पर उन्हें बंद भी किया जाएगा।

पर्यावरणीय निगरानी को मजबूत करने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। केंद्रीकृत ग्रीन वॉर रूम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। वार्ड स्तर पर वायु रक्षक टीमें तैनात होंगी और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 311 प्लेटफॉर्म को और सशक्त किया जाएगा।

हरित आवरण बढ़ाने के तहत वर्ष 2026-27 में 70 लाख पेड़, झाड़ियां और बांस लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य एक करोड़ से अधिक पौधारोपण का है। इस योजना में नवाचार और जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है, जिसमें शोध संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और स्टार्टअप्स के सहयोग से नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह योजना केवल घोषणा नहीं, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही के साथ प्रदूषण नियंत्रण का ठोस मॉडल है, जिसका उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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