Murshidabad Murder Case: बीड़ी श्रमिक सुजीत मंडल की हत्या की जांच CID को सौंपी, पांच पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई

Murshidabad Murder Case: बीड़ी श्रमिक सुजीत मंडल की हत्या की जांच CID को सौंपी, पांच पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज इलाके में बीड़ी श्रमिक और भाजपा कार्यकर्ता सुजीत मंडल की हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस की कथित लापरवाही को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले से जुड़े पांच पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही हत्याकांड की जांच राज्य के आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी को सौंपने की घोषणा की गई है। सुजीत मंडल के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और उनकी पत्नी को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर होम गार्ड की नौकरी देने की भी घोषणा की गई है।

36 वर्षीय सुजीत मंडल बीड़ी श्रमिक थे और भाजपा कार्यकर्ता भी बताए गए हैं। वह 28 अगस्त को अचानक लापता हो गए थे। उनके लापता होने के बाद परिवार के पास फिरौती की मांग को लेकर फोन आने की बात सामने आई थी। इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई, लेकिन बाद में उनके शरीर के क्षत-विक्षत हिस्से बरामद हुए। घटना सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

इस हत्याकांड के संबंध में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे पैसों के लेन-देन से जुड़े विवाद की आशंका जताई गई है। हालांकि हत्या की वास्तविक वजह और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए अब मामले की विस्तृत जांच सीआईडी करेगी।

राज्य सचिवालय नबान्न में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले को सीआईडी को सौंपने और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी गई। सरकार की ओर से कहा गया कि स्थानीय पुलिस के स्तर पर लापरवाही सामने आने के बाद जिम्मेदारी तय करने का फैसला किया गया है।

कार्रवाई के दायरे में जंगीपुर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक सुरिंदर सिंह, फरक्का के उपसंभागीय पुलिस अधिकारी यानी एसडीपीओ शेख शम्सुद्दीन और समसेरगंज थाना तथा धुलियान पुलिस चौकी से जुड़े अधिकारी आए हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ उनकी जिम्मेदारी और भूमिका के अनुसार अलग-अलग कार्रवाई की गई है।

राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर धुलियान पुलिस चौकी के प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक सुमंत कुमार दास को निलंबित करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा समसेरगंज थाने के दूसरे अधिकारी उपनिरीक्षक सैफुल आलम को भी निलंबित किया जाएगा।

समसेरगंज थाने के प्रभारी सुब्रत घोष को पुलिस लाइन्स भेजने का निर्णय लिया गया है। उनके खिलाफ पुलिस महानिदेशक की ओर से जांच भी शुरू की जाएगी। इसके साथ ही समसेरगंज थाने में नए प्रभारी की नियुक्ति करने की घोषणा की गई है।

फरक्का के एसडीपीओ शेख शम्सुद्दीन का दंडात्मक तबादला करने का फैसला किया गया है। वहीं जंगीपुर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक सुरिंदर सिंह को गृह विभाग की ओर से चेतावनी के साथ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। इस तरह मामले में पांच पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

सरकार की ओर से बताया गया कि सुजीत मंडल के परिवार ने उनके लापता होने के बाद समय रहते पुलिस को सूचना दे दी थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस का रवैया कथित तौर पर असहयोगात्मक पाया गया। इसी वजह से मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में देरी से पहुंचा।

मामला शीर्ष स्तर पर पहुंचने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया। पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव ने व्यक्तिगत रूप से मामले की जानकारी ली और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा की। इसके बाद अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गृह सचिव संघमित्रा और पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता भी मौजूद थे। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि हत्या जैसे गंभीर मामले में पुलिस के स्तर पर किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुजीत मंडल की हत्या के तरीके को भी बेहद गंभीर बताया गया है। उनके शरीर को क्षत-विक्षत करने के लिए कथित तौर पर ऐसे औजारों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है, जिनका उपयोग जानवरों की खाल उतारने में किया जाता है। घटना की क्रूरता ने इलाके में पहले हुई हिंसक घटनाओं की याद भी ताजा कर दी।

इस घटना की तुलना मुर्शिदाबाद में अप्रैल 2025 में वक्फ संशोधन विरोधी हिंसा के दौरान हुई हरगोबिंद दास और चंदन दास की हत्याओं से भी की गई। दोनों की हत्या भी इसी इलाके में हुई थी। प्रशासन ने कहा है कि सुजीत मंडल हत्याकांड की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।

सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की है। सुजीत मंडल के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। इसके अलावा उनकी पत्नी सुमोना को होम गार्ड की नौकरी देने की घोषणा की गई है।

हालांकि सुमोना को नौकरी दिए जाने के लिए उनकी सहमति आवश्यक होगी। इसके साथ ही उन्हें होम गार्ड पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं को भी पूरा करना होगा। इन शर्तों को पूरा करने पर उन्हें नौकरी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

हत्याकांड को सीआईडी को सौंपने के पीछे सरकार ने तर्क दिया है कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच पूरी नहीं मानी जा सकती। हिरासत में आरोपियों से विस्तृत पूछताछ, हत्या के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा और मजबूत साक्ष्य जुटाना जरूरी है, ताकि अदालत में दोष साबित किया जा सके और जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

सीआईडी अब इस बात की जांच करेगी कि सुजीत मंडल के लापता होने से लेकर फिरौती के लिए कथित फोन आने और बाद में उनके शरीर के हिस्से मिलने तक घटनाओं की पूरी श्रृंखला क्या थी। इसके अलावा पैसों के लेन-देन का विवाद ही हत्या की मुख्य वजह था या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था, इसकी भी जांच की जाएगी।

मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। परिवार से सूचना मिलने के बाद किस स्तर पर कार्रवाई में देरी हुई, अधिकारियों ने क्या कदम उठाए और मामले की जानकारी वरिष्ठ स्तर तक समय पर क्यों नहीं पहुंची, इन पहलुओं पर भी जवाबदेही तय की जा रही है।

सुजीत मंडल हत्याकांड में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब सीआईडी जांच, पांच पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा के साथ मामला नए चरण में पहुंच गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हत्या की पूरी साजिश सामने लाने और दोषियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

 

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