Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Bulandshahr : खुर्जा के डाबर गांव में नकली पनीर की फैक्ट्री पर छापा, 10 क्विंटल माल सीजChandigarh : मेरे घर या अस्पताल से एक भी पैसा बरामद नहीं हुआ; 42 घंटे की रेड के बाद ईडी खाली हाथ लौटी- डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ाHapur News : हापुड़ में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना भी लगाHapur News : हापुड़ के उद्योगपति संजय गुप्ता का होगा राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में मिलेगा ग्लोबल आइकॉन अवार्डLucknow : जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी- सीएम योगीLucknow : पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय- मुख्यमंत्री योगीAyodhya : ‘पुष्पक विमान’ और ‘राम दरबार’ के साथ ही मोहित करेगी रामायण थीमLucknow : बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी योगी सरकार, 67.50 लाख लोगों को हर महीने मिल रही पेंशन

Modi-Xi Meeting: BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय बैठक, भारत-चीन संबंधों पर हुई चर्चा

Modi Xi Meeting, BRICS Summit 2026, India China Relations, Xi Jinping India Visit, PM Narendra Modi

Modi-Xi Meeting: BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता, भारत-चीन रिश्तों पर टिकी नजरें

नई दिल्ली। राजधानी में चल रहे 18वें BRICS Summit-2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को एक अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। भारत-चीन संबंधों के नजरिए से इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बातचीत में दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर बनाए रखने, आपसी सहयोग बढ़ाने और लंबित मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया।

बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी का स्वागत किया, जिसके बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के कई पहलुओं पर चर्चा की। BRICS सम्मेलन के इतर हुई इस मुलाकात पर वैश्विक समुदाय की भी करीबी नजर रही।

शी जिनपिंग करीब सात साल के अंतराल के बाद भारत पहुंचे हैं। इससे पहले वह 2019 में तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।

2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव और गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन रिश्तों को गहरा झटका लगा था। इसके बाद लंबे समय तक सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और दोनों तरफ बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए गए।

इसके बाद से सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ता हुई, जिसमें तनाव कम करने और सैनिकों के बीच टकराव रोकने पर जोर दिया गया।

पिछले कुछ वर्षों में कुछ विवादित इलाकों में डिसएंगेजमेंट को लेकर प्रगति हुई है, जिससे संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं, हालांकि व्यापक सीमा विवाद अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।

इसी पृष्ठभूमि में नई दिल्ली में हुई मोदी-शी वार्ता को सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। भारत लगातार कहता रहा है कि सीमा पर शांति और सामान्य द्विपक्षीय रिश्ते एक-दूसरे से जुड़े हैं।

आर्थिक मोर्चे पर भी भारत-चीन संबंध दोनों नेताओं की बातचीत के व्यापक संदर्भ में अहम हैं। राजनीतिक तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच बड़े स्तर पर व्यापार जारी है, और चीन भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शुमार है। हालांकि व्यापार असंतुलन लंबे समय से भारत के लिए चिंता का विषय रहा है।

हाल के समय में दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन और संपर्क सामान्य बनाने की दिशा में भी प्रयास हुए हैं, जिसमें वीजा और सीधी उड़ानों जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसी बदलते माहौल में शी जिनपिंग की यह यात्रा अहम मानी जा रही है।

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति शी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित BRICS देशों के नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। भारत इस बार 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है, जिससे नई दिल्ली वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी हुई है।

भारत और चीन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हैं और दोनों के बीच रिश्तों का असर केवल एशिया तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर भी पड़ता है। सीमा विवाद के अलावा व्यापार, निवेश, तकनीक और सुरक्षा जैसे कई मुद्दे भी दोनों देशों के एजेंडे में शामिल रहते हैं।

गलवान झड़प के बाद भारत ने चीन से जुड़े निवेश और तकनीकी गतिविधियों पर सख्ती बरती थी, जिसमें कई चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध और निवेश जांच व्यवस्था सख्त करना शामिल था। इसके बावजूद द्विपक्षीय व्यापार बड़े पैमाने पर जारी रहा, और हाल के वर्षों में संबंधों को स्थिर करने के प्रयास भी तेज हुए हैं। नई दिल्ली की यह बैठक इसी प्रक्रिया की अहम कड़ी मानी जा रही है।

BRICS के भीतर भारत और चीन दोनों संस्थापक सदस्य हैं और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों के हित और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर BRICS एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम बने हुए हैं। इस माहौल में भारत-चीन शीर्ष नेताओं की मुलाकात को खास तवज्जो दी जा रही है, क्योंकि दोनों देशों के स्थिर रिश्ते एशिया और वैश्विक संतुलन के लिए मायने रखते हैं।

हालांकि सभी मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं — वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दे, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। फिर भी मोदी-शी की सीधी बातचीत यह संकेत देती है कि दोनों पक्ष मतभेदों को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने की कोशिश जारी रखना चाहते हैं।

सात साल बाद हुई शी जिनपिंग की यह यात्रा और मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता आगे चलकर भारत-चीन रिश्तों की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सीमा, व्यापार और अन्य मुद्दों पर आगे क्या प्रगति होती है।

 

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें

पाठकों की राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *