Mission Karmayogi: स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के कामकाज में आएगा बदलाव, जनसेवा और जवाबदेही पर जोर
नई दिल्ली, 20 अगस्त। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों के कामकाज को अधिक प्रभावी, जिम्मेदार और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में मिशन कर्मयोगी के तहत नई पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को केवल सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित रखने के बजाय उनकी कार्यक्षमता, जवाबदेही और जनसेवा की भावना को मजबूत करना है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मिशन कर्मयोगी डेवलपमेंट अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (एनआईएचएफडब्ल्यू) में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। सम्मेलन में अधिकारियों की क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और प्रशिक्षण के बाद उसके वास्तविक कामकाज में इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की गई।
क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य डॉ. अलका मित्तल ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल किसी कोर्स को पूरा करना नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक लक्ष्य अधिकारियों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाना, उनमें जवाबदेही की भावना विकसित करना और नागरिकों को बेहतर एवं संवेदनशील सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल को अपने दैनिक कामकाज में लागू करना होगा। इसका असर केवल अधिकारियों की व्यक्तिगत कार्यक्षमता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में भी दिखाई देना चाहिए।
मिशन कर्मयोगी के तहत ‘आई गॉट कर्मयोगी’ प्लेटफॉर्म पर स्वास्थ्य मंत्रालय में अब तक 21,927 नामांकन किए जा चुके हैं, जबकि 17,660 कोर्स पूरे किए जा चुके हैं। अधिकारियों को डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से विभिन्न विषयों पर अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है।
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वास्थ्य विभाग जैसे सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े क्षेत्र में अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक निर्णयों से लेकर स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन और नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने तक अधिकारियों की दक्षता का सीधा प्रभाव लोगों पर पड़ता है।
मिशन कर्मयोगी के माध्यम से प्रशिक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया न रखकर उसे अधिकारियों के व्यवहार, निर्णय लेने की क्षमता और सेवा वितरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण से हासिल दक्षता का वास्तविक लाभ स्वास्थ्य सेवाओं और आम जनता तक पहुंचे।





