Lakshmi Singh speech: निर्णय लेने की ताकत मिलने पर महिलाएं रचती हैं नई मिसालें: लक्ष्मी सिंह

Lakshmi Singh speech: निर्णय लेने की ताकत मिलने पर महिलाएं रचती हैं नई मिसालें: लक्ष्मी सिंह

नोएडा में महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष ओपन हाउस सेशन में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने महिलाओं की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और समाज में उनकी भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला को निर्णय लेने की ताकत मिल जाती है तो वह पीछे मुड़कर नहीं देखती और लगातार आगे बढ़ते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करती है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने समाज के कई आयाम देखे हैं। इनमें कुछ बेहद सकारात्मक रहे तो कुछ ऐसे भी रहे जिनसे समाज की चुनौतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि चाहे कोई महिला नौकरी करने वाली हो या गांव में पशुपालन का काम करने वाली, यदि उसे निर्णय लेने का अधिकार दे दिया जाए तो वह अपनी जिंदगी को नई दिशा देने में सक्षम होती है।

लक्ष्मी सिंह ने कहा कि महिलाओं में स्वाभाविक रूप से नेतृत्व की क्षमता होती है। यदि किसी महिला को जिम्मेदारी दी जाए और उसे निर्णय लेने का अधिकार मिले, तो वह न केवल खुद आगे बढ़ती है बल्कि अपने साथ कई अन्य लोगों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि किसी महिला को यदि एक कुर्सी या जिम्मेदारी दी जाए तो वह उस पद के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अवसर तैयार कर सकती है। यही कारण है कि आज विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं बड़ी जिम्मेदारियां निभाते हुए नजर आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं को सम्मान देने की परंपरा हमेशा से रही है। देश की आजादी के बाद से ही महिलाओं को बराबरी के अधिकार दिए गए हैं और आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान ने महिलाओं को ऐसी विशेष क्षमता दी है कि वे एक साथ कई बातों के बारे में सोच सकती हैं और संतुलित तरीके से निर्णय ले सकती हैं। यही वजह है कि महिलाओं द्वारा लिए गए फैसले अक्सर संतुलित और दूरदर्शी होते हैं।

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि आज के समय में महिलाएं कार्यालयों, अस्पतालों, प्रशासनिक संस्थानों और अन्य कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रही हैं। कई जगहों पर महिलाएं ही प्रमुख निर्णय लेने की भूमिका निभा रही हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज में महिलाओं के प्रति व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं जहां किसी महिला और पुरुष के बीच विवाद हो रहा होता है, लेकिन आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे नहीं आते। ऐसे हालात में महिलाओं के अधिकार और फेमिनिज्म की बातें अधूरी रह जाती हैं।

उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि यदि हम सच में महिलाओं को सम्मान और सुरक्षित जीवन देना चाहते हैं, तो हमें केवल बातें नहीं बल्कि व्यवहार में भी बदलाव लाना होगा। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और बराबरी का अवसर देना समाज की जिम्मेदारी है। जब समाज महिलाओं को प्रतिष्ठा और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मौका देता है, तब ही एक मजबूत और संतुलित समाज का निर्माण संभव हो पाता है।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा किए और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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