Jaypee Wish Town: जेपी विशटाउन की अधूरी परियोजनाओं की जांच 15 दिन में होगी पूरी, खरीदारों को जल्द मिलेगा आशियाना
नोएडा के बहुचर्चित जेपी समूह की आवासीय परियोजनाओं में अपने सपनों के आशियाने के लिए सालों से भटक रहे हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी है। जेपी विशटाउन की अटकी हुई परियोजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर शासन द्वारा गठित विशेष जांच समिति ने अपनी प्रक्रिया तेज कर दी है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले की विस्तृत तकनीकी और वित्तीय जांच अगले 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी और विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा शुरू की गई यह महापरियोजना समय पर पूरी न होने और भारी आर्थिक अनियमितताओं के चलते नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में चली गई थी, जिसके बाद सुरक्षा रियल्टी को इसका टेकओवर सौंपा गया था।
फ्लैट खरीदारों का आरोप है कि एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत रिजोल्यूशन प्लान के तहत काम का जिम्मा मिलने के बाद भी सुरक्षा रियल्टी द्वारा निर्माण कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है। खरीदारों ने कई वर्षों की देरी, निर्माण की घटिया गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर शासन स्तर पर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। जेपी विशटाउन निवासी के आशीष द्वारा 10 अगस्त 2026 को शासन में दी गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए इस जांच समिति का गठन किया गया था। नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) संतोष कुमार की अध्यक्षता में गठित यह समिति सीधे सोसायटियों में जाकर खरीदारों से रूबरू हो रही है और उनकी समस्याएं सुन रही है।
समिति ने सुरक्षा कंपनी से परियोजनाओं की वर्तमान भौतिक प्रगति और बैंकों व खरीदारों से जुटाए गए 3000 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा हिसाब मांगा था। कंपनी की ओर से जो शुरुआती जवाब दिया गया था, वह अधूरा और असंतोषजनक पाया गया, जिसके बाद प्राधिकरण ने कंपनी को शेष सभी बिंदुओं पर तत्काल स्पष्टीकरण देने के कड़े निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फंड का किसी तरह का डायवर्जन न हो और खरीदारों को गुणवत्तापूर्ण फ्लैट समयसीमा के भीतर मिल सकें। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से सख्त फैसले लिए जाएंगे, जिससे जेपी विशटाउन के हजारों पीड़ित परिवारों को जल्द राहत मिलने की संभावना है।


