Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Hapur News : हापुड़ में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना भी लगाHapur News : हापुड़ के उद्योगपति संजय गुप्ता का होगा राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में मिलेगा ग्लोबल आइकॉन अवार्डLucknow : जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी- सीएम योगीLucknow : पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय- मुख्यमंत्री योगीAyodhya : ‘पुष्पक विमान’ और ‘राम दरबार’ के साथ ही मोहित करेगी रामायण थीमLucknow : बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी योगी सरकार, 67.50 लाख लोगों को हर महीने मिल रही पेंशनAyodhya : 15 फीट ऊँचे रामरथ पर विराजेंगे जगत के पालनहारीAyodhya : रामनगरी के दसवें दीपोत्सव में दिखेगा वैश्विक रामकथा का रंग

Gyanesh Kumar Row: अरविंद केजरीवाल बोले- CEC का नहीं, सीधे पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग करे CJP

Gyanesh Kumar, Arvind Kejriwal, Election Commission Row, SIR Voter List, CJP Protest

Gyanesh Kumar Row: अरविंद केजरीवाल बोले- CEC का नहीं, सीधे पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग करे CJP

नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करने की सलाह दी है। केजरीवाल ने कहा कि बार-बार अलग-अलग नेताओं और पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग करने के बजाय आंदोलन को सीधे प्रधानमंत्री के खिलाफ केंद्रित किया जाना चाहिए। उनका यह बयान उस समय आया है जब CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है।

केजरीवाल ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि CJP पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर चुकी है और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार जंतर-मंतर या दूसरे स्थानों पर आंदोलन करने के बजाय पार्टी को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए। केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने जो कुछ किया, वह व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि अपने कथित राजनीतिक ‘बॉस’ के लिए किया। यह केजरीवाल का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

CJP ने इससे पहले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने कहा था कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह देशभर में आंदोलन करेगी। CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी कई मांगें सामने रखी हैं। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने की घोषणा की।

केजरीवाल ने अपने बयान में SIR का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी मतदाता सूचियों को तैयार करने और उनमें बदलाव की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना था कि मुख्य चुनाव आयुक्त दिल्ली में बैठकर पूरे देश की मतदाता सूची की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कुछ राज्यों में मतदाता नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित मामलों का जिक्र करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

हालांकि, चुनाव आयोग ने SIR को लेकर विपक्ष और अन्य आलोचकों के आरोपों के बीच स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े उसके अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं। 26 सितंबर को पूर्ण आयोग की बैठक के बाद जारी आधिकारिक जानकारी में आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 को SIR के लिए जारी मूल आदेश को भी सभी तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक स्तर पर अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन अंतिम आदेश आयोग की सामूहिक स्वीकृति से जारी हुए हैं।

चुनाव आयोग ने SIR के दौरान ‘अनमैप्ड’ और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए भी प्रक्रिया में बदलाव किया है। आयोग के अनुसार बूथ लेवल अधिकारी ऐसे लोगों के घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं। ऐसे मामलों में सामान्य परिस्थितियों में मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी।

SIR और मतदाता सूची को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से दिल्ली में जारी ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नोटिसों के आधार के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। इससे मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर न्यायिक निगरानी का पहलू भी सामने आया है।

केजरीवाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि जनता को अपनी सरकार बदलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके अनुसार मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भरोसा बना रहना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। ये दावे केजरीवाल के हैं और चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बताया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस सहित कई विपक्षी और राजनीतिक समूहों की ओर से भी प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग सामने आई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि SIR तथा अन्य चुनावी फैसले निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए जा रहे हैं।

CJP का 2 अक्टूबर का प्रस्तावित प्रदर्शन अब इस व्यापक विवाद का अगला चरण होगा। केजरीवाल के ताजा बयान से इस आंदोलन की राजनीतिक दिशा को लेकर भी चर्चा बढ़ गई है, क्योंकि उन्होंने संगठन से ज्ञानेश कुमार के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करने को कहा है।

फिलहाल इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दावे और चुनाव आयोग का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने है। SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची से जुड़े सवाल और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक तथा कानूनी बहस जारी है। आने वाले दिनों में अदालतों की कार्यवाही, आयोग की ओर से जारी होने वाली अतिरिक्त जानकारी और प्रस्तावित प्रदर्शनों से इस विवाद की अगली तस्वीर सामने आएगी।

 

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें

पाठकों की राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *