Gorakhpur : गोरखपुर में गोरक्षपीठ के राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि और युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन बुधवार 30 सितंबर को होगा। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी जिसमें देशभर के संत और धर्माचार्य शामिल होंगे।
महंत अवेद्यनाथ का जीवन रामकाज और सामाजिक समरसता को समर्पित रहा। उनका जन्म 18 मई 1919 को उत्तराखंड के गढ़वाल स्थित कांडी गांव में हुआ था। 8 फरवरी 1942 को उन्होंने गोरक्षपीठ में दीक्षा ली और 1969 में महंत दिग्विजयनाथ की चिरसमाधि के बाद गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर बने। सामाजिक समरसता को ध्येय बनाकर उन्होंने हिंदू समाज में छुआछूत और ऊंच नीच के भेद को मिटाने के लिए अभियान चलाया। दलित बस्तियों में सहभोज की परंपरा शुरू की और काशी में डोमराजा के घर संतों के साथ भोजन कर समरसता का संदेश दिया।
श्रीराम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका निर्णायक रही। 21 जुलाई 1984 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ और उन्हें सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। उनके नेतृत्व में आंदोलन गांव गांव तक पहुंचा। बाद में उनके शिष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में मंदिर निर्माण का सपना पूरा हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को व्यापक विस्तार दिया जिसके अंतर्गत आज प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी और चिकित्सा संस्थान संचालित हो रहे हैं। राजनीति में उन्होंने पांच बार मानीराम विधानसभा और चार बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उन्होंने चिरसमाधि ली। उन्हें सामाजिक समरसता के अग्रदूत और श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नायक के रूप में युगों तक याद किया जाएगा।


