Ghaziabad Vasundhara Blast: वसुंधरा पुलिस चौकी के धमाके में एलिवेटेड रोड से वस्तु फेंके जाने की जांच, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का दावा भी संदिग्ध
गाजियाबाद। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र स्थित वसुंधरा पुलिस चौकी में शुक्रवार रात हुए धमाके की पड़ताल में यह पहलू उभरा है कि एलिवेटेड रोड से कोई वस्तु नीचे फेंकी गई हो सकती है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां यह जानने में लगी हैं कि विस्फोट की वजह कोई बाहरी वस्तु थी या कुछ और। वारदात के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का एक संदेश भी आया है, पर उसकी सच्चाई और उसे जारी करने वालों की असल भूमिका की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।
जागरण की रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान एलिवेटेड रोड से विस्फोटक फेंके जाने की बात सामने आई है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट इसे जांच की केवल एक संभावित दिशा मानती है। लिहाजा धमाके का स्वरूप क्या था और उसमें कौन-सी सामग्री इस्तेमाल हुई, इस पर अंतिम तस्वीर फॉरेंसिक जांच के बाद ही साफ होगी। अभी तक इसे पुष्ट विस्फोटक हमला मानते हुए किसी व्यक्ति या संगठन पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
यह घटना छह नवंबर की रात वसुंधरा पुलिस चौकी के पिछले हिस्से के पास घटी। धमाके के असर से खिड़कियों के कांच चटक गए और दीवार में दरार पड़ गई। उस वक्त वहां एक उपनिरीक्षक और सामान देने आया एक डिलीवरी कर्मचारी मौजूद थे। कांच के टुकड़ों से डिलीवरी कर्मचारी जख्मी हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। किसी पुलिसकर्मी को चोट आने की सूचना नहीं है।
शनिवार सुबह पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ घटनास्थल पहुंचे और हालात का मुआयना किया। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ आतंकवाद निरोधक दस्ता, बम निरोधक दस्ता और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी मौके पर जांच में जुटे। धमाके की वजह और प्रकृति समझने के लिए वहां से नमूने एकत्र किए गए हैं।
इसी बीच डीसीपी ऋजुल कुमार ने प्रारंभिक जांच के हवाले से बताया कि मौके से विस्फोटक सामग्री, बारूद या किसी रासायनिक अवशेष के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना था कि धमाके का असल कारण जांच पूरी होने पर सामने आएगा। उनके मुताबिक, जख्मी डिलीवरी कर्मचारी का इलाज कराया गया है और उसकी हालत ठीक है। यह प्रारंभिक जानकारी है; विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण के नतीजे अभी अहम बने रहेंगे।
चौकी के पास से गुजरने वाला एलिवेटेड रोड जांच के केंद्र में इसलिए भी है, क्योंकि ऊपर सड़क से नीचे कोई वस्तु फेंके जाने की आशंका की पड़ताल हो रही है। एजेंसियां यह समझने की कोशिश में हैं कि वारदात से पहले आसपास क्या-क्या गतिविधियां हुईं। जानकारी के अनुसार, इसी इलाके में मिली एक संदिग्ध स्कूटी की भी जांच की जा रही है, हालांकि उस वाहन का धमाके से कोई संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।
धमाके के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘गाजी 2’ नामक अकाउंट से एक पोस्ट डाली गई, जिसमें ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ के नाम से पुलिस को निशाना बनाने की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि अकाउंट का नाम और संदेश में लिखा संगठन का नाम अलग-अलग हैं। महज अकाउंट के नाम या उसकी पोस्ट के आधार पर किसी असली संगठन की पहचान तय नहीं की जा सकती।
जागरण की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह अकाउंट अगस्त 2025 में बनाया गया था और रिपोर्ट छपने के वक्त इसके दो फॉलोअर थे। फिर भी फॉलोअर कम या ज्यादा होने से किसी दावे की सच्चाई या गंभीरता अपने आप तय नहीं हो जाती। जांच में अहम यह होगा कि मूल संदेश कहां से आया, अकाउंट कौन चला रहा है और घटना से उसका वास्तविक जुड़ाव क्या है।
सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे की पुलिस जांच कर रही है। अभी यह साफ नहीं है कि पोस्ट किसी वास्तविक आपराधिक गतिविधि से जुड़े लोगों ने डाली या घटना के बाद किसी ने भ्रम और दहशत फैलाने के इरादे से जिम्मेदारी का दावा कर दिया। उपलब्ध जानकारी में किसी भी संगठन की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
धमाके के कारण को लेकर शुरुआत में एसी यूनिट और पटाखे से जुड़ी आशंकाएं भी जताई गई थीं। इन संभावनाओं के साथ-साथ बाहर से कोई वस्तु फेंके जाने के पहलू पर भी जांच चल रही है। अलग-अलग प्रारंभिक अनुमानों के बीच फॉरेंसिक रिपोर्ट निर्णायक साबित होगी। मौके से लिए गए नमूने परीक्षण के लिए भेज दिए गए हैं।
फिलहाल जांच दो मुख्य सवालों पर टिकी है—धमाका आखिर किस वजह से हुआ और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले संदेश का इस घटना से क्या नाता है। पुलिस और दूसरी एजेंसियां भौतिक व डिजिटल, दोनों तरह के सबूतों को खंगाल रही हैं। किसी संदिग्ध वस्तु, वाहन या ऑनलाइन दावे को घटना से जोड़ने का निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जाएगा।





