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GBU Scam: गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में 5 करोड़ का फर्जीवाड़ा, 12 कर्मचारियों पर केस दर्ज

GBU Scam: गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में 5 करोड़ का फर्जीवाड़ा, 12 कर्मचारियों पर केस दर्ज

ग्रेटर नोएडा स्थित Gautam Buddha University में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी में करीब 5 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामला सामने आने के बाद 12 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

यह पूरा मामला मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के संज्ञान में आने के बाद तेज हुआ। इसके बाद यूनिवर्सिटी के वर्तमान रजिस्ट्रार प्रभारी सीके सिंह ने Ecotech-1 Police Station में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

शिकायत के अनुसार, यूनिवर्सिटी में डॉ. विकास त्रिपाठी का कार्यकाल करीब पांच वर्षों का रहा है। प्रारंभिक जांच में केवल पिछले एक वर्ष के दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें ही लगभग 5 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। आशंका जताई जा रही है कि यदि पूरे पांच वर्षों की जांच की जाती है तो यह रकम और भी बढ़ सकती है।

इस मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी, तत्कालीन वित्त अधिकारी नीरज कुमार, लेखाधिकारी शैलेंद्र कुमार समेत कुल 12 कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। अन्य आरोपियों में मुदित कुमार, विजय प्रताप सिंह, मुकेश पांडे, शिव कुमार खत्री, शिवम, संदीप, श्याम, नवीन और सुभाष के नाम शामिल हैं।

आरोप है कि इन कर्मचारियों ने छात्रों द्वारा जमा की गई फीस में हेराफेरी की। जांच में सामने आया है कि फीस जमा दिखाने के लिए फर्जी यूपीआई ट्रांजेक्शन की रसीदें बनाई गईं और उन्हें यूनिवर्सिटी के शुल्क संग्रह सॉफ्टवेयर में दर्ज किया गया। इससे ऐसा प्रतीत होता था कि फीस जमा हो चुकी है, जबकि वास्तविक राशि यूनिवर्सिटी के बैंक खाते में नहीं पहुंची।

पुलिस के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से किया गया, जिसमें डिजिटल माध्यम का दुरुपयोग कर सिस्टम को धोखा दिया गया।

Arvind Verma, कोतवाली प्रभारी, ने बताया कि शिकायत के आधार पर सभी 12 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है, ताकि अन्य संभावित पहलुओं का भी खुलासा किया जा सके।

यह मामला न केवल शिक्षा संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम के दुरुपयोग की गंभीरता को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस जांच से और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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