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Mizoram Railway Line: मिजोरम को पहली बार रेलवे से जोड़ेगी बैराबी-सैरांग लाइन, राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली-आइजोल की दूरी भी होगी कम

Mizoram Railway Line: मिजोरम को पहली बार रेलवे से जोड़ेगी बैराबी-सैरांग लाइन, राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली-आइजोल की दूरी भी होगी कम

रिपोर्ट: अभिषेक ब्याहुत
अइज़ोल (मिज़ोरम)

देश के पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों की राजधानियों को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने का जो सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देखा है, वो पूरा हो रहा है। त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम के बाद पूर्वोत्तर भारत का राज्य मिजोरम, जो अब तक भारतीय रेलवे नेटवर्क से पूरी तरह अछूता रहा, जल्द ही देश के बाकी हिस्सों से सीधे रेल संपर्क में आ जाएगा। असम से मणिपुर की राजधानी इम्फाल को भी रेल नेटवर्क से जोड़ने की परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है।

चीन, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से जुड़े होने के कारण नॉर्थईस्ट राज्यों में रेल परियोजना को बढ़ावा देना सामरिक और भौगोलिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक मजबूत पहल है।

मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहली बार ट्रेन चलने का यह ऐतिहासिक परिवर्तन जल्द ही होने वाला है। मिजोरम के बैराबी से सैरांग तक 51.38 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन निर्माण परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है। इस रेल मार्ग पर ट्रायल रन भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। CRS ने अपने निरीक्षण में इस रेल ट्रैक पर ट्रेन चलाने के लिए हरी झंडी भी दे दी है। उम्मीद है सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे।

CPRO नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के.के. शर्मा ने बताया कि यह परियोजना न केवल मिजोरम को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, बल्कि यह राज्य के लोगों के लिए आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से एक बड़ा परिवर्तन लाएगी। असम के सिलचर रेलवे स्टेशन से बैराबी तक वर्ष 2016 से पैसेंजर ट्रेन चल रही है। वहीं बैराबी से सैरांग होते हुए आइजोल की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। यह यात्रा सड़क मार्ग से करनी पड़ती है, जिसमें पांच से छह घंटे का समय लगता है। वहीं रेल सेवा शुरू होने के बाद यही दूरी केवल एक से डेढ़ घंटे में तय की जा सकेगी। इससे परिवहन सस्ता, सुरक्षित और सुगम होगा, वहीं लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से लोगों को सस्ता सामान मार्केट में मिलने लगेगा।

इस नई रेल लाइन से मिजोरम के लोग अब सीधे गुवाहाटी, कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों तक पहुंच सकेंगे। इससे राज्य के किसानों, व्यापारियों और छात्रों को जहां सुविधा मिलेगी, वहीं पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।

इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर, कंस्ट्रक्शन, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) विनोद कुमार ने बताया कि 11 वर्ष के कठिन और संघर्षमय प्रयासों के बदौलत यह प्रोजेक्ट आज वर्ष 2025 में हमने पूरा कर लिया है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में रेल मंत्रालय ने लगभग 8071 करोड़ खर्च किए हैं। वर्ष 2008–2009 में इस प्रोजेक्ट की मंजूरी मिली थी। सर्वे और 2011 में भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा होने के बाद वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी।

ये पुल है सबसे ऊंचा
ये पुल है सबसे ऊंचा

चीफ इंजीनियर विनोद कुमार ने बताया कि बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में बनाई गई है। मिजोरम क्षेत्र में भारी वर्षा के साथ मानसून की लंबी अवधि के कारण अप्रैल से अक्टूबर तक कोई काम संभव नहीं होता। साल के केवल चार–पाँच महीने (यानी नवंबर से मार्च तक) हम लोग तेजी से काम कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि “यह मार्ग पहाड़ी इलाकों, गहरी घाटियों और जंगलों से होकर गुज़र रहा है, जिसके लिए सुरंगों और ऊँचे पुलों के निर्माण में बहुत जटिलता आई है।” इसके अलावा गुवाहाटी से सिलचर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात में बार-बार रुकावट के कारण और मिजोरम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट करना भी एक बहुत बड़ी चुनौती थी। रेत, गिट्टी आदि निर्माण सामग्री और क्रेन तथा अन्य मशीनों को कंस्ट्रक्शन साइट तक ले जाने में ही बहुत वक्त लगता था।

उन्होंने बताया कि इस लाइन पर कुल 48 सुरंगें, 55 बड़े रेल ब्रिज, 87 छोटे रेल ब्रिज, 5 रोड ओवर ब्रिज, 6 रोड अंडर ब्रिज बनाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट में ब्रिज नंबर 196 देश का दूसरा सबसे ऊंचा रेल ब्रिज है, जो 104 मीटर ऊंचा है, जो कुतुब मीनार से लगभग 42 मीटर ऊंचा है। इस ब्रिज को भूकंप-रोधी तकनीक से तैयार किया गया है। यह पुल पूर्वोत्तर की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रेलवे इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट उपलब्धि है।

आपको बता दें कि हाल ही में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने जानकारी दी थी कि केंद्र सरकार ने आइजोल से दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस शुरू करने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया था कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से उनकी मुलाकात के बाद यह निर्णय लिया गया। जल्द ही आइजोल से दिल्ली, कोलकाता और अगरतला के लिए सीधी रेल सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे मिजोरम को देश की राजधानी सहित प्रमुख शहरों से जोड़ने में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।

सैरांग रेलवे स्टेशन को भी विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। राज्य सरकार और रेलवे मंत्रालय की संयुक्त कोशिशों से यहां एक अत्याधुनिक स्टेशन परिसर विकसित किया जा रहा है, जो भविष्य में पूर्वोत्तर के एक मॉडल स्टेशन के रूप में देखा जाएगा।

मिजोरम जैसे सीमावर्ती राज्य में रेलवे का आगमन सिर्फ यातायात का नया विकल्प नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। रेलवे से जुड़े इस सपने को हकीकत में बदलना सिर्फ मिजोरम ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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