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आर्थिक सर्वे 2025-26 : वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्यौरा

Lucknow : Uttar Pradesh Finance Minister Suresh Kumar Khanna speaks during the winter session of UP Assembly in Lucknow on Wednesday, November 29, 2023. (Photo: IANS/Phool Chandra)

Lucknow News : वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। पटल पर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। आर्थिक सर्वे के आंकड़े के अनुसार, प्रदेश सरकार चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के विस्तार और आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया गया 46,728.48 करोड़ का बजट
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 46,728.48 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। यह अब तक का सर्वाधिक आवंटन है, जिससे यह साफ है कि प्रदेश सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। बजट में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की “स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट ऑफ 2025-26” रिपोर्ट का हवाला देते हुए आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का 6.1 प्रतिशत रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। यह तथ्य दर्शाता है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अन्य राज्यों की तुलना में अधिक निवेश कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर प्रकाशित राष्ट्रीय लेखा अनुमानों और अद्यतन रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश के कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार द्वारा वहन किए जा रहे खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही आम लोगों के आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर में कमी दर्ज की गई है। आर्थिक सर्वे के अनुसार यह बदलाव इस बात का संकेत है कि सरकारी निवेश बढ़ने से नागरिकों पर स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक बोझ कम हो रहा है। अस्पताल, क्लीनिक, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वास्थ्य अवसंरचना में सुधार के लिए अधिक बजट आवंटन किया गया है, जिससे सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।

वर्ष 2024-25 में गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या घटकर 1.66 लाख पहुंची
आर्थिक सर्वे में यह भी बताया गया है कि प्रदेश में राज्य सरकार के सुधारात्मक प्रयासों और जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं के प्रभाव से संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की सक्रिय भूमिका से गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा। वर्ष 2021-22 में प्रदेश में कुल 34.74 लाख संस्थागत प्रसव हुए थे, जो वर्ष 2024-25 में 18.02 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 41 लाख तक पहुंच गए। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कुल प्रसव का 96.12 प्रतिशत संस्थागत प्रसव रहा। इसके विपरीत गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या वर्ष 2021-22 में 3.35 लाख थी, जो वर्ष 2024-25 में 50.44 प्रतिशत की कमी के साथ घटकर 1.66 लाख रह गई। यह उपलब्धि सरकार के सकारात्मक प्रयासों और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।

वर्ष 2024-25 में 100 प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण किया गया
प्रदेश में टीकाकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, प्रदेश के सभी जनपदों में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों पोलियो, टीबी, गलाघोंटू, टिटनेस, काली खांसी, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी (हिब), हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (जे.ई.), खसरा, रूबेला और डायरिया से बचाव के लिए नियमित रूप से निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को टिटनेस से बचाव के लिए टीके लगाए जा रहे हैं।

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत एचएमआईएस (HMIS)डाटा के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 100 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया। वहीं वर्ष 2025-26 में सितंबर 2025 तक 28.62 लाख बच्चे (98 प्रतिशत) पूर्ण रूप से प्रतिरक्षित किए जा चुके हैं। आर्थिक सर्वे में इसे जन-जागरूकता अभियानों, सेवा प्रदायगी में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सकारात्मक परिणाम बताया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में नवजात, शिशु और बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU),न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (पोषण पुनर्वास केंद्र), गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (HBNC)और कंगारू मदर केयर (KMC)जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कमजोर और कुपोषित बच्चों को विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है, जिससे बाल स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार हो रहा है।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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