Trump UN Speech: ट्रंप ने UN महासभा में ईरान को लेकर दो टूक कहा- परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, 8 युद्ध रोकने का किया दावा
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान के साथ जारी युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा और अमेरिका की विदेश नीति को लेकर कई बड़े दावे किए। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका ने ईरान को समझौते का अवसर दिया था, लेकिन तेहरान की ओर से हमले जारी रहे। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध लगभग खत्म होने की स्थिति में है और उनका प्रशासन तेहरान की परमाणु क्षमता को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों से क्षेत्र में अस्थिरता और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगाए तथा कहा कि अमेरिका ने उसकी सैन्य और मिसाइल क्षमताओं को रोकने के लिए कार्रवाई की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी दावा किया कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता तो इससे मध्यपूर्व और दुनिया की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस स्थिति को पैदा नहीं होने देगा। ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी सैन्य नीति का बचाव करते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया।
यह भाषण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और इजराइल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक जांच में कहा गया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों के दो मामलों में युद्ध अपराध के मानदंडों पर विचार करने लायक पर्याप्त आधार मिले हैं। इन विशेषज्ञों ने खास तौर पर एक स्कूल और एक खेल परिसर तथा आवासीय क्षेत्र पर हुए हमलों का उल्लेख किया है। अमेरिकी प्रशासन ने इन निष्कर्षों को स्वीकार नहीं किया है और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
ट्रंप ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर भी आलोचनात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था को अनुचित हस्तक्षेप नहीं करने देगा। उनके भाषण में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अमेरिकी घरेलू नीतियों से जुड़े मुद्दे भी शामिल रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने प्रशासन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में मजबूत हुआ है। उन्होंने अवैध प्रवासन पर अपनी सरकार की कार्रवाई का भी जिक्र किया और दावा किया कि अमेरिका की सीमा अब पहले से अधिक सुरक्षित है। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल को अमेरिका के लिए बदलाव का दौर बताया।
ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है और इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में काम जारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की प्रक्रिया उनकी अपेक्षा से अधिक तेजी से आगे बढ़ सकती है।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने दुनिया में शांति स्थापित करने को लेकर भी अपनी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्धों को रुकवाने में मदद की है। ट्रंप ने कहा कि जब दूसरे देश केवल बातचीत तक सीमित रहे, तब अमेरिका ने कई मामलों में कार्रवाई की। यह दावा उनके भाषण के प्रमुख राजनीतिक संदेशों में से एक रहा।
ट्रंप ने ईरान के अलावा क्यूबा को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने क्यूबा को गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझता हुआ देश बताया और कहा कि अमेरिका वहां बुनियादी बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है। उनके भाषण के दौरान क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के सभागार से बाहर जाने की भी खबर सामने आई।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उनका प्रशासन राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सैन्य क्षेत्र में बढ़े अमेरिकी निवेश का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 12 महीनों में उनकी सरकार ने सेना पर रिकॉर्ड स्तर पर धन खर्च किया है।
ट्रंप के भाषण से पहले ही ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा तेज थी। ईरानी नेतृत्व इस युद्ध को अमेरिकी और इजराइली आक्रामक कार्रवाई बताता रहा है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को रोकना है। दोनों पक्षों के बीच इन दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा मतभेद बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस समय ईरान के साथ युद्ध के अलावा गाजा, इजराइल, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दे भी प्रमुख हैं। दुनिया के कई देशों के नेता इस दौरान युद्धों के प्रभाव, नागरिकों की सुरक्षा और कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर अपने-अपने विचार रख रहे हैं।
ट्रंप के भाषण के बाद अब निगाहें ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत पर भी हैं। अमेरिका की ओर से एक तरफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया जा रहा है, तो दूसरी ओर बातचीत और समझौते की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होने के संकेत भी दिए जा रहे हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली कूटनीतिक बैठकों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और अमेरिका अपनी सैन्य नीति को इसी लक्ष्य से जोड़कर देख रहा है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा अमेरिकी हमलों पर उठाए गए सवाल और वाशिंगटन की ओर से उनकी अस्वीकृति इस पूरे विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और संवेदनशील बना रही है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंध, युद्ध की दिशा और संभावित बातचीत पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।


