Delhi SIR: रेखा गुप्ता और केजरीवाल परिवार को मतदाता रिकॉर्ड पर नोटिस, ड्राफ्ट सूची से 47.56 लाख नाम बाहर
नई दिल्ली। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस पाने वालों में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। नोटिस जारी होना संबंधित मतदाता को अयोग्य ठहराए जाने या उसका नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाए जाने के बराबर नहीं है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में मतदाता रिकॉर्ड में कथित ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सामने आने की बात कही गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके रिकॉर्ड में अभिभावक और उनके बीच उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम दर्ज होने के कारण सत्यापन की जरूरत बताई गई है। इसी आधार पर रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
अरविंद केजरीवाल के साथ उनके परिवार के चार सदस्यों को भी नोटिस मिलने की जानकारी है। इनमें उनके पिता गोबिंद राम केजरीवाल, मां गीता देवी, पत्नी सुनीता केजरीवाल और बेटे पुलकित केजरीवाल शामिल हैं। इन रिकॉर्ड को पिछली SIR से मैप नहीं होने वाली श्रेणी में रखा गया है।
इस श्रेणी का अर्थ यह है कि मौजूदा मतदाता विवरण का पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया। ऐसे मामलों में निर्वाचन अधिकारी संबंधित मतदाता से जरूरी जानकारी और दस्तावेज लेकर पात्रता तथा रिकॉर्ड का सत्यापन करते हैं।
दिल्ली में SIR के तहत मतदाता सूची का बड़े स्तर पर पुनरीक्षण किया जा रहा है। पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान मतदाता विवरण की तुलना के दौरान जिन मामलों में मैपिंग नहीं हुई या उम्र, पारिवारिक विवरण अथवा अन्य जानकारी में तार्किक विसंगति मिली, उन्हें अलग श्रेणियों में रखकर जांच की जा रही है।
सामने आए आंकड़ों के अनुसार दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 47.56 लाख नाम बाहर हुए हैं। वहीं लगभग 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में नो-मैपिंग या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी जैसी स्थितियां चिन्हित की गई हैं। इतने बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड जांच के दायरे में आने के कारण SIR प्रक्रिया राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बनी हुई है।
ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने और अंतिम मतदाता सूची से नाम हटने में अंतर होता है। रिकॉर्ड में समस्या मिलने वाले मतदाताओं को अपनी पात्रता और विवरण स्पष्ट करने का अवसर दिया जाता है। संबंधित दस्तावेज और जवाबों की जांच के बाद ही निर्वाचन अधिकारी अंतिम निर्णय लेते हैं।
इसलिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अरविंद केजरीवाल या उनके परिवार के सदस्यों को नोटिस मिलने को उनके मतदान अधिकार समाप्त होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। फिलहाल यह मतदाता रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया का हिस्सा है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से 19 सितंबर को बूथ स्तर पर विसंगतियों से संबंधित डेटा भी प्रकाशित किए जाने की जानकारी है। निर्वाचन अधिकारी अब संबंधित मतदाताओं से मिलने वाले जवाब और दस्तावेज के आधार पर रिकॉर्ड की जांच करेंगे।
इस प्रक्रिया से जुड़ा एक पहलू सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। नोटिस पाने वालों की सूची और नोटिस जारी करने के आधार को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर कानूनी सवाल उठे हैं। बड़े पैमाने पर मतदाता रिकॉर्ड की जांच के बीच पारदर्शिता भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
दिल्ली में SIR को लेकर राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आम आदमी पार्टी ने बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने और रिकॉर्ड मैपिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर निर्वाचन प्रक्रिया के तहत अधिकारी पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
रेखा गुप्ता और केजरीवाल परिवार से जुड़े रिकॉर्ड में अलग-अलग प्रकार की विसंगतियों की बात सामने आई है। रेखा गुप्ता के मामले में उम्र से जुड़ी लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी बताई गई है, जबकि केजरीवाल परिवार के रिकॉर्ड पिछली SIR से मैप नहीं होने वाली श्रेणी में रखे गए हैं।
आगे संबंधित मतदाताओं के जवाब, दस्तावेज और निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले सत्यापन प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए मौजूदा नोटिस को अंतिम निर्णय नहीं माना जाएगा।


