Noida Cyber Crime: नोएडा में फिनटेक कंपनी के खाते से 43 ट्रांजेक्शन के जरिए 1.56 करोड़ रुपये निकाले
नोएडा। साइबर अपराधियों ने रैपिडपे फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के एक फील्ड एजेंट के मोबाइल फोन और ऐप को कथित तौर पर हैक कर कंपनी के बैंक खाते से 1 करोड़ 56 लाख 68 हजार 668 रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए। पुलिस के अनुसार, 3 अक्टूबर की सुबह 10:41 बजे से 11:04 बजे के बीच कुल 43 अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए गए। मामले में कंपनी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि जितिन जयशील करकेरास ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि रैपिडपे फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड डिजिटल वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी के फील्ड एजेंट और कारोबारी प्रतिनिधि मोबाइल ऐप के माध्यम से ग्राहकों से जुड़े वित्तीय लेनदेन करते हैं। 3 अक्टूबर को कंपनी के बैंक खाते से अचानक बड़ी संख्या में ऐसे लेनदेन हुए, जिन्हें कंपनी की ओर से अधिकृत नहीं किया गया था।
शिकायत के अनुसार, कुछ ही मिनटों के भीतर कुल 43 ट्रांजेक्शन के माध्यम से कंपनी के खाते से 1 करोड़ 56 लाख 68 हजार 668 रुपये अलग-अलग खातों में भेजे गए। कंपनी ने इन सभी लेनदेन को संदिग्ध मानते हुए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद कंपनी की ओर से पुलिस को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई।
कंपनी प्रतिनिधि के मुताबिक, संदिग्ध लेनदेन उसके फील्ड एजेंट धीरेज कुमार केशरी के मोबाइल फोन में इस्तेमाल किए जा रहे ऐप के जरिए हुए। एजेंट सोनभद्र के विंढमगंज क्षेत्र का रहने वाला है। कंपनी का कहना है कि एजेंट के मोबाइल फोन या ऐप पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने नियंत्रण हासिल कर लिया और इसके बाद उसके जरिए कंपनी के खाते से लेनदेन किए गए।
कंपनी ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने फील्ड एजेंट धीरेज कुमार केशरी पर किसी तरह के गलत काम का आरोप नहीं लगा रही है। कंपनी को आशंका है कि एजेंट के मोबाइल फोन और ऐप के साथ छेड़छाड़ की गई और किसी अन्य व्यक्ति ने उसका इस्तेमाल कर लेनदेन किए। कंपनी ने पुलिस से इस पहलू की भी जांच करने का अनुरोध किया है कि मोबाइल और ऐप तक किसने पहुंच बनाई और रकम किन-किन बैंक खातों में भेजी गई।
खातों का पूरा विवरण पुलिस को सौंपा
कंपनी ने शिकायत के साथ सभी 43 ट्रांजेक्शन का विवरण पुलिस को उपलब्ध कराया है। इसमें संबंधित बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, बैंक का नाम, लाभार्थी का नाम और ट्रांजेक्शन रेफरेंस नंबर शामिल हैं। कंपनी ने पुलिस से इन खातों की जांच करने और ठगी की रकम को जल्द से जल्द फ्रीज कराने की मांग की है, ताकि रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने से रोका जा सके।
कंपनी के अनुसार, सभी 43 संदिग्ध ट्रांजेक्शन की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई है। अलग-अलग ट्रांजेक्शन से संबंधित पोर्टल के एक्रॉलेजमेंट नंबर भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। इससे पुलिस को रकम के ट्रांजेक्शन की कड़ी और संबंधित खातों की जांच में मदद मिलने की उम्मीद है।
मोबाइल, ऐप और बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
डीसीपी साइबर प्रीति यादव के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फील्ड एजेंट के मोबाइल फोन और रैपिडपे ऐप तक आरोपियों ने किस तरीके से पहुंच बनाई। जांच के दौरान मोबाइल डिवाइस, ऐप की गतिविधियों, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
पुलिस उन बैंक खातों की भी जांच कर रही है, जिनमें कंपनी के खाते से रकम ट्रांसफर हुई। इन खातों से जुड़े बैंक अधिकारियों से भी पुलिस टीम ने संपर्क किया है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ट्रांसफर की गई रकम वर्तमान में कहां है और उसे आगे किन खातों में भेजा गया।
पुलिस अब संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, यूपीआई आईडी और अन्य डिजिटल माध्यमों की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर साइबर अपराधियों तक पहुंचने और रकम की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं। मामले में डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


