Cyber Fraud: इंस्टाग्राम पर सरकारी दस्तावेज बनवाने का झांसा देकर ठगी करने वाला गिरफ्तार, बैंक खातों पर पहले से छह शिकायतें
नोएडा। इंस्टाग्राम के माध्यम से सरकारी दस्तावेज बनवाने का दावा कर लोगों से रुपये ऐंठने के आरोप में साइबर थाना पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी कम समय में लेबर कार्ड, जाति प्रमाणपत्र और आय प्रमाणपत्र समेत विभिन्न दस्तावेज बनवाने का भरोसा देकर लोगों से अपने बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाता था। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद वह पीड़ित का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर संपर्क खत्म कर देता था।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान हर्षित वर्मा के रूप में हुई है। वह मूल रूप से मुरादाबाद का रहने वाला है और वर्तमान में ग्रेटर नोएडा के तिलपता स्थित डिफेंस एम्पायर सोसाइटी में किराये पर रह रहा था। साइबर थाना पुलिस की टीम ने उसे तिलपता में डेंसो कंपनी के पास से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से कथित ठगी में इस्तेमाल किया जा रहा मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
इस मामले में फतेहपुर निवासी अंकुश कुमार की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की थी। अंकुश ने पुलिस को बताया कि लेबर कार्ड बनवाने के नाम पर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 5,300 रुपये जमा करवाए गए थे। रकम देने के बावजूद उनका दस्तावेज नहीं बनाया गया और बाद में संबंधित व्यक्ति ने उनसे बातचीत बंद कर दी। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत की जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि आरोपी के बैंक खातों के खिलाफ साइबर क्राइम पोर्टल पर पहले से छह शिकायतें दर्ज हैं। इसके बाद शिकायत में मिले मोबाइल नंबर की जांच प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से की गई। तकनीकी जांच में मोबाइल नंबर की गतिविधि तिलपता क्षेत्र में मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसे पकड़ लिया।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने इंस्टाग्राम पर एक आईडी बना रखी थी। इसके माध्यम से वह कथित तौर पर ऐसे लोगों से संपर्क करता था, जिन्हें लेबर कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र या अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने में परेशानी हो रही होती थी। इंस्टाग्राम पोस्ट और प्रचार के जरिए लोगों को कम समय में दस्तावेज बनवाने का भरोसा दिया जाता था।
पुलिस का दावा है कि बातचीत शुरू होने के बाद आरोपी दस्तावेज बनवाने के बदले कमीशन तय करता था। शुरुआत में करीब 300 रुपये अपने बैंक खाते में जमा करवाता और इसके बाद बाकी रकम लेने के लिए पीड़ित को क्यूआर कोड भेजता था। पूरी रकम मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था।
साइबर थाना पुलिस अब आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की विस्तृत जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस तरीके से कितने लोगों से रकम ली गई और क्या इस कथित ठगी में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


