Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Hapur News : हापुड़ में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना भी लगाHapur News : हापुड़ के उद्योगपति संजय गुप्ता का होगा राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में मिलेगा ग्लोबल आइकॉन अवार्डLucknow : जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी- सीएम योगीLucknow : पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय- मुख्यमंत्री योगीAyodhya : ‘पुष्पक विमान’ और ‘राम दरबार’ के साथ ही मोहित करेगी रामायण थीमLucknow : बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी योगी सरकार, 67.50 लाख लोगों को हर महीने मिल रही पेंशनAyodhya : 15 फीट ऊँचे रामरथ पर विराजेंगे जगत के पालनहारीAyodhya : रामनगरी के दसवें दीपोत्सव में दिखेगा वैश्विक रामकथा का रंग

Cyber Fraud Call Center: दिल्ली में चलती SUV के अंदर चल रहा था ऑनलाइन धोखाधड़ी का कॉल सेंटर, तीन आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली में ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले एक ऐसे आरोपित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस से बचने और अपनी लोकेशन छिपाने के लिए चलती कार को ही कॉल सेंटर बना रखा था। दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले के साइबर थाने की टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी सफेद मारुति सुजुकी ब्रेजा कार में बैठकर मोबाइल फोन की मदद से व्यक्तियों को कॉल करते थे और विभिन्न स्थानों पर घूमते हुए अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे। इस आरोपित गिरोह पर म्यूल बैंक अकाउंटों की मदद से ऑनलाइन धोखाधड़ी की पैसों को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का भी आरोप है।

पुलिस टीम ने पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त लोकेश तोमर (37), हिमांशु राठौर और तुषार (35) के रूप में की है। पुलिस टीम ने इनके पास से एक सफेद मारुति सुजुकी ब्रेजा कार, सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, पांच पैन कार्ड, चार पहचान कार्ड या उनकी प्रतियां, छह चेकबुक, तीन पासबुक और अनेक अन्य संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। बरामद सामान की जांच को आधार बनाकर जांच कर रही पुलिस को संदेह है कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से ऑनलाइन धोखाधड़ी की गतिविधियों में शामिल थे और इसके लिए विभिन्न बैंक अकाउंटों का उपयोग कर रहे थे।

पुलिस अधिकारियों की जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण की छानबीन मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी नीलेश विश्वकर्मा की शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई। शिकायत करने वाले ने आरोप लगाया था कि उन्हें बीमा पॉलिसियों में निवेश की गई करीब 45 लाख रुपये की पैसे वापस दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोपियों ने कथित रूप से इस रकम के रिफंड की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर उनसे प्रोसेसिंग फीस मांगी और इसी बहाने 65 हजार रुपये ऑनलाइन ठग लिए। प्रभावित व्यक्ति को जब धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उन्होंने इसकी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। प्रकरण की गंभीर प्रकृति को देखते हुए दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिला साइबर थाने में FIR नंबर 80/2026 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 112(2) में मुकदमा दर्ज किया गया।

प्रकरण की जांच के दौरान पुलिस टीम ने शिकायत से जुड़े बैंक अकाउंटों और वित्तीय ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। इसी बीच हिमांशु राठौर से जुड़े इंडियन ओवरसीज बैंक के एक खाते में संदिग्ध ट्रांजैक्शन का विवरण सामने आई। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह खाता राष्ट्रीय ऑनलाइन अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को आधार बनाकर जांच के दायरे में आया था। बैंक रिकॉर्ड और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन की पड़ताल से पुलिस को इस नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों के बारे में सुराग मिले। इसके उपरांत पुलिस टीम ने तकनीकी जांच और निगरानी की मदद से आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाना आरंभ किया।

मामले की पड़ताल के बीच पुलिस को एक सफेद मारुति सुजुकी ब्रेजा कार के संबंध में अहम सूचना मिली। पुलिस का कहना है कि आरोपी इसी कार को चलते-फिरते कॉल सेंटर के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। वे एक स्थान पर लंबे समय तक रुकने के बजाय वाहन को विभिन्न इलाकों में ले जाते थे, ताकि उनकी वास्तविक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो और पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। कार के अंदर बैठकर मोबाइल फोन की मदद से संभावित पीड़ितों से बातचीत की जाता था। पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी के बाद पुरानी कोंडली इलाके में इस कार को रोककर तीनों आरोपियों को पकड़कर गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस आरोपित नेटवर्क में तीनों आरोपियों की विभिन्न भूमिकाएं सामने आई हैं। लोकेश तोमर पर नेटवर्क के संचालन और ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्राप्त पैसों को आगे पहुंचाने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का संदेह है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वह ऐसे बैंक अकाउंटों की व्यवस्था करता था, जिनकी मदद से धोखाधड़ी से प्राप्त रकम प्राप्त की जाती थी और फिर विभिन्न माध्यमों से आगे ट्रांसफर की जाती थी। अब पुलिस उसके संपर्कों और वित्तीय ट्रांजैक्शन की भी इस पहलू की पड़ताल कर रही है।

दूसरी ओर, तुषार पर संभावित पीड़ितों को फोन करके खुद को अधिकारी या किसी संबद्ध संस्था का प्रतिनिधि बताने का आरोप है। पुलिस अधिकारियों की जानकारी के अनुसार, वह व्यक्तियों को विभिन्न वित्तीय योजनाओं और रिफंड से जुड़े प्रस्तावों का भरोसा दिलाकर उनसे संपर्क करता था। इसके उपरांत कथित रूप से ओटीपी और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती थी। दूसरी ओर, हिमांशु राठौर की संलिप्तता बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने और उनकी मदद से धोखाधड़ी से प्राप्त रकम प्राप्त करने तथा आगे ट्रांसफर करने से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस इन सभी आरोपों का सत्यापन के लिए डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड और साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।

कार से बरामद दस्तावेजों में नौ पन्नों की ग्राहक सूची, एक हस्ताक्षर किया हुआ चेक, दो किरायानामे, 11 पासपोर्ट आकार की तस्वीरें और एक संदिग्ध जाली NPCI मुहर भी शामिल है। इसके अतिरिक्त काफी संख्या में बैंकिंग और पहचान संबंधी दस्तावेज मिले हैं। जांच कर रही पुलिस को संदेह है कि इन दस्तावेजों का उपयोग विभिन्न बैंक अकाउंट खुलवाने, खातों का संचालन करने या ऑनलाइन धोखाधड़ी के नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता था। वर्तमान में बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल जारी है, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।

अब पुलिस लोकेश तोमर के संभावित पुराने आपराधिक मामलों की भी पड़ताल कर रही है। इसके अतिरिक्त मुंबई और तेलंगाना में सामने आए ऑनलाइन धोखाधड़ी के कुछ मामलों से उसके आरोपित संबंधों की पड़ताल जारी है। जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नेटवर्क किन-किन राज्यों में सक्रिय था और इसकी मदद से कितने व्यक्तियों को निशाना बनाया गया। बैंक अकाउंटों में हुए संदिग्ध ट्रांजैक्शन, मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, व्हाट्सऐप चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आधार बनाकर गिरोह से जुड़े दूसरे व्यक्तियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।

वर्तमान में तीनों आरोपियों से पूछताछ चल रही है और पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से इस पहलू की पड़ताल कर रही है। ईस्ट जिला पुलिस टीम ने आम व्यक्तियों से अपील की है कि बीमा पॉलिसी का बड़ा रिफंड दिलाने, निवेश की पैसे वापस कराने या किसी वित्तीय योजना में काफी लाभ दिलाने के नाम पर मांगी जाने वाली अग्रिम फीस से सावधान रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या बैंक अकाउंट से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। यदि किसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या संबंधित आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें