India Japan Education: गलगोटियास यूनिवर्सिटी के जापान के साथ हुए समझौते की CM योगी ने की सराहना, शैक्षणिक-औद्योगिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गलगोटियास विश्वविद्यालय द्वारा जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर और यामानाशी यूनिवर्सिटी के साथ किए गए सहमति पत्र (एमओयू) की सराहना की है। उन्होंने इस समझौते को उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
गलगोटियास विश्वविद्यालय का यह समझौता जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर और यामानाशी यूनिवर्सिटी के साथ किया गया है। इसके माध्यम से भारत और जापान के बीच शिक्षा तथा उद्योग के क्षेत्र में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
इस समझौते से जुड़े कार्यक्रम में जापान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। जानकारी के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल में 200 से अधिक सदस्य शामिल थे। इसका नेतृत्व यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोतारो नागासाकी ने किया।
प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के जरिए दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक क्षेत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं को विस्तार देने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे उत्तर प्रदेश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक और औद्योगिक भागीदारी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
समझौते के माध्यम से गलगोटियास विश्वविद्यालय और जापान के संबंधित संस्थानों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे शिक्षा के साथ औद्योगिक क्षेत्र में भी नई संभावनाओं के लिए रास्ता तैयार होने की बात कही गई है।
भारत और जापान के बीच पहले से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग रहा है। अब गलगोटियास विश्वविद्यालय, यामानाशी प्रीफेक्चर और यामानाशी यूनिवर्सिटी के बीच हुआ यह एमओयू शैक्षणिक एवं औद्योगिक क्षेत्र में आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इस सहयोग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को भी विस्तार मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
गलगोटियास विश्वविद्यालय के इस समझौते को भारत-जापान शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आने वाले समय में इस एमओयू के तहत सहयोग से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।


