Chandigarh : युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पंजाब के स्कूल पूरे साल नशा विरोधी जागरूकता गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे

Chandigarh : भगवंत मान सरकार के नशे के ख़िलाफ़ अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत, पंजाब भर के स्कूलों को छात्रों में नशे के दुरुपयोग के ज़ोख़िमों और दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करने तथा स्वस्थ और नशा-मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए, योजनाबद्ध ढंग से गतिविधियों की एक व्यवस्थित श्रृंखला आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्टेट कौंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) द्वारा जारी गतिविधि कैलेंडर के अनुसार, स्कूल पूरे शैक्षणिक वर्ष के दौरान छात्रों, शिक्षकों और स्कूल समुदाय के अन्य सदस्यों को शामिल करते हुए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित करेंगे। अगस्त महीने में छात्र नशा विरोधी संदेशों वाले पोस्टर बनाएँगे।

सितंबर महीना विशेष रूप से अभिभावकों को नशा विरोधी अभियान से जोड़ने के लिए समर्पित होगा। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTMs) के माध्यम से अभिभावकों को नशीले पदार्थों से जुड़े ज़ोख़िमों तथा नशे की समस्या के शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप के महत्त्व के बारे में जागरूक करें।

अक्तूबर में कविता लेखन और क्विज़ प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। नवंबर से फरवरी तक, नशा विरोधी जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित करने के अलावा, स्थानीय समुदाय के सदस्यों को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। प्रातःकालीन सभाओं में नशा विरोधी शपथ दिलाई जाएगी और छात्रों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएँगे, ताकि उन्हें नशे के ज़ोख़िमों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके।

स्कूलों को ड्रग-फ्री क्लब स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिनमें शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सदस्य बनाया जाएगा। उन्हें रचनात्मक और संवादात्मक माध्यमों से जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए भी कहा गया है, ताकि छात्र केवल पारंपरिक भाषणों तक सीमित रहने के बजाय इस मुद्दे से सक्रिय रूप से जुड़ सकें। स्वस्थ जीवनशैली और सोच-समझकर निर्णय लेने पर केंद्रित गतिविधियाँ इस कार्यक्रम का महत्त्वपूर्ण हिस्सा होंगी।

इस अभियान का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य ऐसे शिक्षकों की पहचान करना है, जो छात्रों में नशे से जुड़ी समस्याओं से निपटने के तरीके को समझते हों। 21,000 से अधिक शिक्षकों को छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और नशे के सेवन के शुरुआती संकेतों की पहचान करने तथा समय रहते हस्तक्षेप करने के लिए आवश्यक क्षमता और व्यावहारिक कौशल से लैस किया जा रहा है।

इसके अलावा, स्कूल छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन के ज़ोख़िमों और दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित करने के लिए वीडियो आधारित नशा विरोधी पाठ्यक्रम (एंटी ड्रग करिकुलम) का इस्तेमाल करेंगे। जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ स्कूलों को गुमनाम सूचना पेटियाँ लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है, ताकि छात्र नशीले पदार्थों के संभावित सेवन या इससे जुड़े अन्य मामलों की सूचना दे सकें।

इस संबंध में, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई कक्षाओं से शुरू होनी चाहिए। शिक्षा और रोकथाम नशे के ख़िलाफ़ इस निर्णायक लड़ाई में हमारे सबसे शक्तिशाली हथियार हैं। जागरूकता, मूल्यों और अनुशासन के माध्यम से युवा मन की रक्षा करना ही पंजाब में नशे की समस्या को समाप्त करने का एकमात्र स्थायी रास्ता है।”

निर्देशों के तहत, स्कूलों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूल परिसर के आसपास 500 मीटर का क्षेत्र नशा-मुक्त हो और वे समय-समय पर इसके अनुपालन की रिपोर्ट दें। गतिविधियों की निगरानी के लिए एक तंत्र भी अनिवार्य किया गया है। इसके तहत स्कूल प्रमुखों और मेंटर्स को गतिविधियों की समीक्षा करने तथा तस्वीरों सहित उनका रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सालभर चलने वाला यह कैलेंडर पंजाब के व्यापक ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का हिस्सा है और इसका उद्देश्य छात्रों की भागीदारी, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, शैक्षिक सामग्री और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़कर स्कूलों में नशे की रोकथाम के लिए एक सतत व्यवस्था तैयार करना है।

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