Cancer Screening: कैंसर से लड़ाई में निःशुल्क स्क्रीनिंग मॉडल बनेंगे मोर्चा, केंद्र सरकार देगी समर्थन
नई दिल्ली, 5 फरवरी: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए समुदाय-आधारित और निःशुल्क स्क्रीनिंग मॉडल अत्यंत जरूरी हैं। यह बात रक्षा राज्य मंत्री डॉ. संजय सेठ ने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस), वसंत कुंज में आयोजित विश्व कैंसर दिवस 2026 के अवसर पर कही। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ऐसे प्रयासों को नीति और संस्थागत सहयोग के माध्यम से प्रोत्साहित करेगी, जिससे देशभर में कैंसर रोकथाम और समय पर पहचान को बढ़ावा मिलेगा।
आईएलबीएस के ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम की वैश्विक थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनिक’ रही। कार्यक्रम में व्यक्ति-केंद्रित कैंसर देखभाल पर विशेष जोर दिया गया और इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना तथा शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान सुनिश्चित करना था। इस अवसर पर निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लिवर, प्रोस्टेट, ओरल, स्तन, सर्वाइकल और फेफड़ों के कैंसर की जांच की गई। लगभग 100 लोगों ने इस शिविर में भाग लिया और निःशुल्क जांच करवाई।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान और चिकित्सा शिक्षा सत्र (सीएमई) भी आयोजित किए गए। इसके अलावा कैंसर योद्धाओं और स्वास्थ्य कर्मियों का सम्मान कर उनकी सेवाओं की सराहना की गई। आईएलबीएस के निदेशक डॉ. एस. के. सरिन, डब्ल्यूएचओ सीएरो के निदेशक डॉ. सुमन रिजाल और डॉ. अनिल गोयल ने भी इस कार्यक्रम में भाग लेकर इसे और अधिक प्रभावशाली बनाया।
डॉ. संजय सेठ ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी का मुकाबला केवल उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों और संगठनों से आह्वान किया कि वे निःशुल्क और समुदाय-आधारित स्क्रीनिंग मॉडल को अपनाएं ताकि कैंसर से ग्रसित लोगों को शुरुआती उपचार और देखभाल सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों ने भी कहा कि निःशुल्क स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है और लोगों को समय रहते इलाज मिलने के अवसर मिल सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम न केवल मरीजों के लिए बल्कि उनके परिवारों और समाज के लिए भी जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
आईएलबीएस ने इस अवसर पर कैंसर जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित कीं, जिनमें पंपलेट वितरण, स्वास्थ्य पर सेमिनार और लाइव डेमो शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें नियमित स्क्रीनिंग की आदत डालना था।


