BRO Project Chetak: सीमावर्ती सड़कों को नेशनल हाईवे डबल लेन मानकों पर किया जा रहा अपग्रेड
सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की दिशा में बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) लगातार बड़े कदम उठा रहा है। इसी क्रम में प्रोजेक्ट चेतक के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ी सड़कों को नेशनल हाईवे के डबल लेन मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है।
राजस्थान के बीकानेर में प्रोजेक्ट चेतक ने अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। वर्ष 1980 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट ने अपने आदर्श वाक्य ‘चेतक का प्रयास, देश का विकास’ के साथ राजस्थान, पंजाब और गुजरात के उत्तरी इलाकों में सड़क नेटवर्क के विकास और रखरखाव में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रोजेक्ट चेतक, BRO के सबसे बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है। इसके अंतर्गत 4000 किलोमीटर से अधिक लंबा सड़क नेटवर्क और करीब 214 किलोमीटर का ‘डच कम बंड’ शामिल है। ये सड़कें अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचने वाली मुख्य फीडर सड़कों के रूप में काम करती हैं और रक्षा बलों की त्वरित आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इन सड़कों को आधुनिक मानकों के अनुसार अपग्रेड करने का काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही सुगम हो सके और आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके। इसके साथ ही इन सड़कों का फायदा सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मिल रहा है, जिससे उनके लिए आवागमन और व्यापार के नए अवसर खुल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास भी सुनिश्चित होता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से कनेक्टिविटी बढ़ती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
BRO का यह प्रयास देश की सीमाओं को सुरक्षित और मजबूत बनाने के साथ-साथ ‘विकास के माध्यम से सुरक्षा’ की सोच को भी आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में इन सड़कों के और उन्नयन से भारत की सामरिक क्षमता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।


