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Ankita Bhandari Case: पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ के आवास पर CBI की छापेमारी, हरिद्वार में करीब 3 घंटे तक हुई पूछताछ

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Ankita Bhandari Case: पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ के आवास पर CBI की छापेमारी, हरिद्वार में करीब 3 घंटे तक हुई पूछताछ

अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 17 अक्टूबर 2026 को ज्वालापुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ से पूछताछ की। जांच टीम पहले हरिद्वार में उनके घर पहुंची और फिर बीएचईएल के शिवालिक गेस्ट हाउस में सवाल-जवाब हुए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूछताछ लगभग तीन घंटे चली। इससे एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता दिल्ली में सीबीआई अधिकारियों से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके थे।

सीबीआई की यह कार्रवाई अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका के संबंध में उठ रहे सवालों के बीच हुई है। दिसंबर 2025 में अभिनेत्री उर्मिला सनावर के वीडियो और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया था। इन रिकॉर्डिंग के संबंध में दावा किया गया कि हत्याकांड में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका की चर्चा हुई थी। सोशल मीडिया पर वायरल कथित बातचीत में वरिष्ठ भाजपा नेता का नाम जोड़े जाने के बाद इस मामले की दोबारा जांच और कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और किसी व्यक्ति की संलिप्तता केवल आरोपों को आधार बनाकर साबित नहीं मानी जा सकती।

अंकिता भंडारी के माता-पिता वीरेंद्र भंडारी और सोनी देवी ने शुक्रवार को दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। इसी क्रम में उनके संग सांसद अनिल बलूनी भी मौजूद थे। परिजनों ने जांच एजेंसी को ज्ञापन सौंपकर मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच करने और कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और अभिनेत्री उर्मिला सनावर का नार्को टेस्ट कराने की मांग भी रखी, ताकि सामने आई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े दावों की सच्चाई का पता लगाया जा सके। सीबीआई अधिकारियों ने परिवार को भरोसा दिया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

इस प्रकरण में सुरेश राठौड़ का नाम कथित ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद चर्चा में आया था। उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर कथित रिकॉर्डिंग साझा करते हुए हत्याकांड में एक वीआईपी की भूमिका के संबंध में दावे किए थे। राठौड़ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कथित ऑडियो से उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और रिकॉर्डिंग के संबंध में भी सवाल उठाए थे। इसलिए सीबीआई की मौजूदा पूछताछ को जांच की एक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए; इसे किसी आरोप की पुष्टि या दोष साबित होने के रूप में नहीं माना जा सकता।

अंकिता भंडारी 19 वर्षीय युवती थीं, जो उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी और उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस प्रकरण में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य सहित तीन आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका के संबंध में समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब सीबीआई की जांच में इस पहलू के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।

अंकिता के माता-पिता लंबे समय से मामले में पूर्ण न्याय और कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने दिल्ली के इंडिया गेट पर भी प्रदर्शन किया था। उनकी मांगों के संबंध में कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी समर्थन जताया था। उत्तराखंड में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज है, खासकर दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद। हालाँकि, नियुक्ति और हत्याकांड से जुड़े आरोप अलग-अलग विषय हैं, जिनमें किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच के प्रमाणों का इंतजार करना जरूरी है।

वर्तमान में सीबीआई की तरफ से सुरेश राठौड़ से पूछताछ की कार्रवाई सामने आई है। जांच एजेंसी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, संबंधित लोगों के बयानों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है। आगे की जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वीआईपी से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई है और क्या इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध हैं। अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने और मामले के अनसुलझे पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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