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अल्केमिस्ट अस्पतालः किडनी ट्रांसप्लांट में नए कीर्तीमान स्थापित कर रहा है

अल्केमिस्ट अस्पताल
अल्केमिस्ट अस्पतालः किडनी ट्रांसप्लांट में नए कीर्तीमान स्थापित कर रहा है

अल्केमिस्ट अस्पतालः किडनी ट्रांसप्लांट में नए कीर्तीमान स्थापित कर रहा है

यमुनानगर 20 दिसंबर : अल्केमिस्ट अस्पताल पंचकूला ने उत्तरी भारत में किडनी ट्रांसप्लांट देखभाल में अपनी स्थिति मजबूत की है। यमुनानगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नीरज गोयल ने अस्पताल की बेजोड़ उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें उत्तरी हरियाणा का पहला ABO-असंगत ABOi किडनी ट्रांसप्लांट और स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट शामिल है।

डॉ. गोयल ने जीवन बचाने में किडनी ट्रांसप्लांट की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए शुरुआत की। “किडनी फेलियर एक जानलेवा स्थिति है, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट रोगियों को स्वस्थ जीवन जीने का मौका देता है। अल्केमिस्ट अस्पताल में सही तरीके से रोगियों की देखभाल रोगियों के लिए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करता है। 350 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट के साथ हम इस क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए नये मानक स्थापित कर रहे हैं, ”उन्होंने कहा, इसमें स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट मील का पत्थर साबित हुआ है।
अल्केमिस्ट अस्पताल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में पहला स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट 2019 में सफलतापूर्वक किया गया था। दोनों मरीज पूर्णतः स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इस जटिल प्रक्रिया में दो परिवार शामिल थे – एक कश्मीर से और दूसरा यमुनानगर से, जिन्होंने प्यार और त्याग के असाधारण मिसाल कायम की। एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्रा ने एक अन्य मरीज को बचाने के लिए अपनी किडनी दान की, जबकि उसकी पत्नी ने छात्रा की माँ को बचाने के लिए अपनी किडनी दान की।

डॉ. गोयल ने कहा, ’स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सटीक समन्वय और असाधारण सर्जिकल विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। ये प्रक्रियाएँ मानवीय करुणा और चिकित्सा उन्नति का प्रमाण हैं। इस ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक करना मेरे करियर के सबसे पुरस्कृत क्षणों में से एक रहा है।’

डॉ. गोयल ने एबीओ-असंगत किडनी ट्रांसप्लांट में अस्पताल के नेतृत्व पर भी चर्चा की, जो उन रोगियों के लिए एक अत्याधुनिक प्रक्रिया है जिनके पास समान ब्लड ग्रुप दाता नहीं है।

उन्होंने बताया, ’एबीओआई ट्रांसप्लांट अत्यधिक जटिल होते हैं और एंटीबॉडी को हटाने तथा रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को असंवेदनशील बनाने के लिए प्लास्मफेरेसिस जैसे उन्नत उपचार की आवश्यकता होती है। इन चुनौतियों के बावजूद, हमारे परिणाम वैश्विक मानकों से मेल खाते हैं। यह क्षमता हमें उन रोगियों को आशा प्रदान करती है, जिनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं होता।’

डॉ. गोयल ने भारत में अंगदान को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर प्रकाश डाला। 140 करोड़ की आबादी के बावजूद, देश में प्रति मिलियन केवल 0.8 अंगदाता हैं, जो आबादी की तुलना में बहुत कम है।

डॉ. गोयल ने कहा, ‘अंगदान एक जीवन रक्षक कार्य है, और इसके बारे में जागरूकता आवश्यक है। अल्केमिस्ट अस्पताल में हमारी टीम न केवल जटिल ट्रांसप्लांट करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि अंगदान करने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। जन साधारण को अंगदान करने के लिए जागरूक और शिक्षित कर हम बढ़ती मांग और अंगों की सीमित आपूर्ति के बीच की खाई को कम कर सकते हैं।’

डॉ. गोयल ने कहा कि अल्केमिस्ट अस्पताल का लक्ष्य किडनी ट्रांसप्लांट में उत्कृष्टता के लिए नए मानक स्थापित करना और ज़रूरतमंद हर मरीज़ को उम्मीद प्रदान करना है। अस्पताल के उल्लेखनीय प्रभाव के उदाहरण के रूप में कई दिल को छू लेने वाली कहानियाँ हैं। अंजू विज के भाई प्रदीप ने उनकी जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान की और अब वह ठीक हैं। तनिषा, जो अपने किडनी ट्रांसप्लांट के समय 10वीं कक्षा में पढ़ती थी, चिकित्सा पेशे से इतनी प्रेरित हुई कि उसने विज्ञान में अपनी पढ़ाई जारी रखी और अब डॉक्टर बनने के लिए चिकित्सा विषयों को चुना है। मुकुल, जो बाल चिकित्सा ट्रांसप्लांट का मरीज़ है, अब अपनी पढ़ाई जारी रख रहा है और 12वीं कक्षा में है। श्री मदान ने अपनी पत्नी को बचाने के लिए अपनी किडनी दान करके, सामाजिक पूर्वाग्रहों को तोड़कर और दूसरों को प्रेरित करके एक मिसाल कायम की। ये नेक उदाहरण समाज के लिए प्रेरणा का काम करते हैं, जो किडनी ट्रांसप्लांट और अंग दान के गहन प्रभाव को उजागर करते हैं।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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