Voter List Revision: छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची संशोधन का निर्देश, 21 जनवरी 2027 को अंतिम सूची
भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश के छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision) कराने का फैसला लिया है। इस अभियान के तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, गलत जानकारियों में सुधार करने और अपात्र प्रविष्टियों की जांच करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हों और आगामी चुनावों के लिए मतदाता सूची सही एवं अद्यतन रहे। इसके लिए आयोग ने पूरी प्रक्रिया का कार्यक्रम जारी कर दिया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 30 नवंबर 2026 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा, जबकि 21 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
इस अभियान के दायरे में चार राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम के अलावा चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब निर्वाचन आयोग ने नियमित रूप से मतदाता सूची में संशोधन और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, सबसे पहले मतदान केंद्रों के युक्तिकरण और पुनर्व्यवस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए 20 नवंबर 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। इसके उपरांत 30 नवंबर को एकीकृत प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इस सूची में अपना नाम, पता या अन्य जानकारी गलत पाए जाने पर मतदाता दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए 30 नवंबर से 30 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा 16 जनवरी 2027 तक करना होगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 21 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
इस अभियान में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिन युवाओं की उम्र 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष पूरी हो रही है, वे मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। साथ ही जिन युवाओं की उम्र 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष पूरी होगी, उनके अग्रिम आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। यद्यपि, इन आवेदनों पर संबंधित तिमाही में कार्रवाई की जाएगी, जब आवेदक मतदान के लिए निर्धारित आयु पूरी कर लेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को मतदाता बनने के लिए समय पर पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराना है।
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने के संबंध में भी सख्त प्रावधान निर्धारित किए हैं। आयोग के निर्देशों के अनुसार, किसी पात्र मतदाता का नाम मनमाने तरीके से नहीं हटाया जा सकेगा। यदि किसी मतदाता की मृत्यु होने, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने या एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आती है, तो संबंधित मामले में सत्यापन करना जरूरी होगा। किसी व्यक्ति का नाम हटाने से पहले निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी को संबंधित मतदाता को नोटिस देना और सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराना होगा। इसके उपरांत ही कारणों सहित अंतिम आदेश जारी किया जा सकेगा।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि नाम हटाने से जुड़े प्रस्तावों की सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की वेबसाइट, कार्यालयों और मतदान केंद्रों के सूचना पट्टों पर जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भी इन सूचियों की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें। नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
नाम हटाने के मामलों में अतिरिक्त जांच की व्यवस्था भी की गई है। यदि किसी मतदान केंद्र पर कुल मतदाताओं की संख्या के दो प्रतिशत से अधिक नाम हटाने के प्रस्ताव आते हैं, तो निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी को इनकी व्यक्तिगत रूप से दोबारा जांच करनी होगी। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति पांच से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन करता है, तो ऐसे मामलों का भी अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा। इन निर्देशों का उद्देश्य गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका को कम करना है।
आधार कार्ड के संबंध में निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता पंजीकरण के लिए आधार संख्या देना स्वैच्छिक रहेगा। फॉर्म-6 और फॉर्म-8 में आधार नंबर उपलब्ध कराना अनिवार्य नहीं होगा। किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड या आधार संख्या उपलब्ध नहीं होने को ध्यान में रखते हुए उसका आवेदन खारिज नहीं किया जा सकेगा और न ही मौजूदा मतदाता सूची से उसका नाम हटाया जा सकेगा। पात्र नागरिक आधार संख्या के बिना भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और जरूरी सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक फॉर्म-6ए के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराने या मतदाता सूची से नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए फॉर्म-7 निर्धारित किया गया है। दूसरी ओर, निवास स्थान बदलने, नाम-पते में सुधार, मतदाता पहचान पत्र बदलने और अन्य विवरणों में संशोधन के लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जाएगा। नागरिक निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल और ईसीआईनेट ऐप के माध्यम से भी इन सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
मतदान केंद्रों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी आयोग ने कई निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा, ताकि मतदाताओं को मतदान करने के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़े। सामान्य तौर पर किसी मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं रखने का प्रावधान है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि मतदाताओं को अपने निर्धारित मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय न करनी पड़े। बहुमंजिला इमारतों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों, शहरी झुग्गी बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाए जा सकते हैं।
आयोग ने महिला मतदाताओं और 18 से 19 वर्ष के युवाओं के पंजीकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा है। इसके अतिरिक्त मतदाता सूची में महिला-पुरुष अनुपात, अलग-अलग आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या और मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या में असामान्य बदलाव की जांच की जाएगी। जहां भी पंजीकरण में कमी या किसी तरह की विसंगति सामने आएगी, वहां उसे दूर करने के लिए संबंधित अधिकारी आवश्यक कदम उठाएंगे।
इस अभियान में प्रवासी मजदूरों, बेघर लोगों, रैन बसेरों में रहने वाले नागरिकों और कमजोर वर्गों के लोगों को भी शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, अनुसूचित जनजातियों, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों का पंजीकरण बढ़ाने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक जानकारी या पंजीकरण की सुविधा के अभाव में मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
निर्वाचन आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए पर्याप्त कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की जाए। जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के पद खाली नहीं रहने चाहिए। साथ ही पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के तबादले के लिए आयोग की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। राजनीतिक दलों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा और उनके प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अभी चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। इनमें दिल्ली, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भी मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। इसलिए दिल्ली समेत इन राज्यों के मतदाताओं को वर्तमान में छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए घोषित कार्यक्रम को अपने यहां लागू नहीं मानना चाहिए।
अब संबंधित छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद नागरिक अपने नाम और अन्य जानकारियों की जांच कर सकेंगे। यदि किसी का नाम सूची में नहीं है या विवरण में कोई गलती है तो निर्धारित समय के भीतर आवेदन और आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी। पूरी प्रक्रिया के बाद 21 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।





