Chinmaya Amrit Mahotsav: भारत मंडपम में वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन, पीएम मोदी ने युवाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा पर दिया जोर
दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया। तीन दिवसीय यह आयोजन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों का हिस्सा है। सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वामी चिन्मयानंद के योगदान, युवा शक्ति और विकसित भारत के लक्ष्य पर अपने विचार रखे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय मिशन को भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान और चेतना से जुड़ा विचार बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और दर्शन लोगों को जीवन को समझने तथा समाज एवं मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा देते हैं। उनके संबोधन में आध्यात्मिक विरासत को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने और उसे भविष्य तक पहुंचाने की जरूरीता पर जोर रहा।
युवाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमताएं देश के भविष्य को आकार देने में अहम हैं। उन्होंने चिन्मय मिशन के युवा स्वयंसेवकों के कोशिशों की सराहना की और भारतीय ज्ञान तथा मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में उनकी भूमिका का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने युवाओं से सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ वर्ष 1993 में हुई मुलाकात को याद किया। उन्होंने जानकारी दी कि वह शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद की शताब्दी से जुड़े कार्यक्रम के उद्देश्य से उन्हें आमंत्रित करने पहुंचे थे। मोदी के अनुसार, उस मुलाकात में युवा शक्ति और उसके माध्यम से मजबूत भारत के निर्माण के संबंध में बातचीत हुई थी।
सम्मेलन के समय आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ा खास अनुभव भी प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे भावनात्मक बताते हुए उनके विचारों और योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत, उपनिषद और भगवद्गीता की शिक्षाओं को नागरिकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से अहम कार्य किया।
शिक्षा के विषय पर प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के संस्थानों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में मिशन के 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थान आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय मूल्यों से भी विद्यार्थियों को परिचित करा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने मातृभाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान और तकनीक के समन्वय को अहम बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विचार रखे। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के श्रीराम मंदिर, उज्जैन के महाकाल महालोक तथा केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित रखना और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में विदेशों से 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां भारत वापस लाई गई हैं।
सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए मोदी ने लोगों से देश के विकास के उद्देश्य से मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रत्येक नागरिक को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने की जरूरीता बताई। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि चिन्मय मिशन के आचार्य, साधक और स्वयंसेवक इस दिशा में योगदान दे सकते हैं।
चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। वर्ष 1951 में स्थापित चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा पर केंद्रित इस आयोजन में आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा और युवा सशक्तीकरण से जुड़े विषय शामिल हैं। सम्मेलन के माध्यम से मिशन के विचारों और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उद्देश्य रखा गया है।





