Saturday, 7 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Lucknow : योगी सरकार में पारदर्शी भर्ती से मिली खाकी वर्दी, सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरेLucknow : दीपावली और छठ पूजा पर अलर्ट मोड में रहेंगे मेडिकल कॉलेज, 24 घंटे सक्रिय रहेंगी इमरजेंसी सेवाएंLucknow : योगी सरकार आपदा में जान गंवाने वालों के परिवार को देगी अब आठ लाख की आर्थिक मददAyodhya : उप राष्ट्रपति के आगमन से दीप प्रज्ज्वलन तक, रामनगरी में मजिस्ट्रेटों को अलग-अलग कमानMathura : वृंदावन में धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में उतरा संत समाज, बोला संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तानChandigarh : चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के लिए भाजपा ईडी , सीबीआई, इनकम टैक्स और इलेक्शन कमीशन का दुरुपयोग कर रही है- हरपाल सिंह चीमाBulandshahr : खुर्जा के डाबर गांव में नकली पनीर की फैक्ट्री पर छापा, 10 क्विंटल माल सीजChandigarh : मेरे घर या अस्पताल से एक भी पैसा बरामद नहीं हुआ; 42 घंटे की रेड के बाद ईडी खाली हाथ लौटी- डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा

Noida LIC Loan Fraud: एलआईसी पॉलिसी में फर्जीवाड़ा कर 7.62 लाख रुपये का लोन लेने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज

Noida LIC Loan Fraud: एलआईसी पॉलिसी में फर्जीवाड़ा कर 7.62 लाख रुपये का लोन लेने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज

नोएडा में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पॉलिसी के नाम पर दस्तावेजों में हेराफेरी कर 7.62 लाख रुपये का लोन लेने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाज ने पॉलिसी धारक की पहचान का इस्तेमाल कर डुप्लीकेट बॉन्ड हासिल किया और उसके आधार पर लोन की रकम अपने बैंक खाते में मंगा ली। धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब असली पॉलिसी धारक ने मैच्योरिटी की रकम के लिए आवेदन किया। कोर्ट के आदेश पर फेज वन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एलआईसी के प्रशासनिक अधिकारी अनिल चौहान ने अदालत में दी गई शिकायत में बताया कि 26 सितंबर 2025 को दिल्ली स्थित शाखा से एक ई-मेल प्राप्त हुआ था। इसमें पॉलिसी धारक गुरप्रीत सिंह लाम्बा ने मैच्योरिटी की रकम जारी करने का अनुरोध किया था। आवेदन के साथ वर्ष 2009 में जारी मूल पॉलिसी बॉन्ड भी संलग्न था।

दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि इसी पॉलिसी का डुप्लीकेट बॉन्ड 25 मार्च 2022 को जारी कराया गया था। इसी दिन पॉलिसी पर 7 लाख 62 हजार 300 रुपये के लोन का आवेदन भी किया गया था। एलआईसी की ओर से दस्तावेजों के आधार पर लोन की पूरी रकम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में भेज दी गई थी।

मैच्योरिटी भुगतान की प्रक्रिया के दौरान जब पॉलिसी पर पहले से लोन होने की बात सामने आई, तो गुरप्रीत सिंह लाम्बा ने इससे साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने न तो लोन के लिए आवेदन किया था और न ही किसी को इसके लिए दस्तावेज दिए थे।

इसके बाद एलआईसी अधिकारियों ने लोन की रकम जिस बैंक खाते में भेजी गई थी, उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई। इसमें खाताधारक की फोटो, पता और हस्ताक्षर पॉलिसी धारक के मूल रिकॉर्ड से अलग मिले। इससे किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा फर्जी पहचान और दस्तावेजों के जरिए लोन लेने का संदेह गहरा गया। एलआईसी अधिकारी ने बैंक से भी खाते से जुड़ी जानकारी मांगी, लेकिन कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसके बाद पीड़ित पक्ष ने अदालत का रुख किया। अदालत के आदेश पर दर्ज मुकदमे में अब पुलिस बैंक खाते और डुप्लीकेट बॉन्ड जारी कराने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर जल्द ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें

पाठकों की राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *