Prayagraj/Lucknow : काकोरी केस के महानायक अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को राष्ट्रीय गौरव दिलाने और स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का नाम उनके नाम पर करने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के अवसर पर ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को उसकी ऐतिहासिक पहचान और राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए। साथ ही आम लोगों से 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस पर मलाका जेल पहुंचकर अमर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित करने की अपील की गई।
छात्र-युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिया समर्थन
एसआरएन अस्पताल परिसर में चल रहे धरने में शनिवार को दिनभर छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक पहुंचते रहे। लोगों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान अस्पताल का नाम उनके नाम पर करने की मांग के समर्थन में नारे भी लगाए गए।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि देश आजादी का अमृत काल मना रहा है और वर्ष 2026 ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी का वर्ष है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर काकोरी केस के महानायक ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल और उनसे जुड़ी क्रांतिकारी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए।
मलाका जेल में हुआ था ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक एवं क्रांतिकारी-शहीद वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए महान क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान प्रयागराज की मलाका जेल में हुआ था। उस दौर में मलाका जेल की गिनती संयुक्त प्रांत की कुख्यात जेलों में होती थी। उन्होंने कहा कि आज उसी ऐतिहासिक बलिदान स्थल पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थापित है, लेकिन इस स्थान से जुड़ी क्रांतिकारी विरासत की पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है। ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थल को ठाकुर रोशन सिंह के नाम से पहचान दिलाना उनके बलिदान के प्रति सच्चा सम्मान होगा।
‘एसआरएन का नाम तत्काल ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर हो’
डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि महुआ डाबर संग्रहालय की स्पष्ट मांग है कि एसआरएन अस्पताल का नाम तत्काल अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाए। काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के वर्ष में भी यदि क्रांतिकारियों के सम्मान और उनकी स्मृतियों के संरक्षण को लेकर सरकारें गंभीर कदम नहीं उठाती हैं तो स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों के प्रति दी जाने वाली श्रद्धांजलि महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया, आज उनकी स्मृतियों और विरासत को सम्मान दिलाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
बलिदान स्थल की ऐतिहासिक पहचान कायम रखना जरूरी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता दुबे ने कहा कि अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के पवित्र बलिदान स्थल का संरक्षण और उसकी ऐतिहासिक पहचान को कायम रखना बेहद जरूरी है। महान क्रांतिकारी की विरासत और धरोहर को संरक्षित करने का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें उनके योगदान के अनुरूप गौरवशाली सम्मान नहीं मिल जाता।
9 अगस्त को मलाका जेल पहुंचने की अपील
महुआ डाबर संग्रहालय के प्रतिनिधि डॉ. अवनीश सिंह ने आम नागरिकों से 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस के अवसर पर मलाका जेल पहुंचकर काकोरी केस के क्रांतिवीर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वह ऐतिहासिक तारीख है, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवाओं, नागरिकों और सामाजिक संगठनों से ठाकुर रोशन सिंह के सम्मान और उनके बलिदान स्थल की ऐतिहासिक पहचान कायम रखने की मांग को समर्थन देने का आह्वान किया।
धरने में प्रमुख रूप से राजन तिवारी, हिमांशु सिंह, विक्की यादव, सात्विक सिंह, अमित गिरी, चंदन पासी, आइश पटेल, सम्राट राय, अनुराग सिंह, अमन तिवारी और प्रत्यूष सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
