Cervical Cancer: भारत में सर्वाइकल कैंसर के नए मामलों में 37% की गिरावट, समय पर स्क्रीनिंग और HPV वैक्सीनेशन का दिखा बड़ा असर
नई दिल्ली। भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी सकारात्मक उपलब्धि सामने आई है। देश में सर्वाइकल (सर्विक्स) कैंसर के नए मामलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगभग 37 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पहले जहां हर साल करीब 1.27 लाख महिलाओं में इस कैंसर की पहचान होती थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 79 हजार रह गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियान, समय पर स्क्रीनिंग, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से जांच सुविधाओं के विस्तार और ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
एम्स के डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर उन गिने-चुने कैंसरों में शामिल है, जिन्हें समय पर जांच, उपचार और एचपीवी वैक्सीन के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जांच सुविधाओं के विस्तार तथा एचपीवी टीकाकरण को बढ़ावा देने जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन पहलों का प्रभाव अब नए मामलों में कमी के रूप में दिखाई दे रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में स्क्रीनिंग सुविधाओं की पहुंच सीमित है और एचपीवी वैक्सीन को लेकर जागरूकता का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिसके कारण कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर उन्नत अवस्था में पहुंच चुका होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2030 तक सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन के लिए 90-70-90 लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत 15 वर्ष की आयु तक 90 प्रतिशत लड़कियों का एचपीवी टीकाकरण, 35 और 45 वर्ष की आयु तक 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग तथा सभी मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। भारत भी इसी दिशा में स्क्रीनिंग और टीकाकरण कार्यक्रमों को तेजी से मजबूत कर रहा है।
डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, एचपीवी संक्रमण, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण, धूम्रपान और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि यदि मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद असामान्य रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त स्राव, शारीरिक संबंध के दौरान दर्द या लगातार पेल्विक दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर एचपीवी वैक्सीन लगवाना और नियमित रूप से पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट कराना इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। स्वास्थ्य विभाग भी महिलाओं से नियमित जांच कराने और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील कर रहा है।
