
New Delhi : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में यमुना पुनर्जीवीकरण के मुद्दे पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि साफ और स्वच्छ यमुना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारा संकल्प है और हम सभी को मिलकर इसे जल्दी ही पूरा करना है। यमुना नदी हमारी साझी विरासत है, इसलिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकारें व सभी संबंधित मंत्रालय यमुना की स्वच्छता के लिए टुकड़ों में नहीं बल्कि एक टीम भावना से एकीकृत कार्य योजना के तहत काम करें।
अमित शाह ने कहा कि हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तीनों राज्य मिलकर यमुना नदी में मानक ईको-फ्लो सुनिश्चित करें। दिल्ली की डेयरियों के वेस्टेज को यमुना में जाने से रोकने के लिए एमसीडी और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच एमओयू साइन होगा, जो इसे गोबर गैस तथा खाद में तब्दील करेगा। एनडीबी मॉडल के तहत डेयरी और गौशालाओं का गोबर सीधे गैस और खाद प्लांट तक पहुंचेगा और यमुना किनारे के कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाएगा।
यमुना नदी में प्रवाहित नालों की डीसिल्टिंग का काम तेजी से चल रहा है। इस वर्ष लक्षित 28.57 लाख मीट्रिक टन में से 97 प्रतिशत गाद निकाली जा चुकी है और बाकी 15 जून तक निकाल ली जाएगी। गाद का इस्तेमाल विभिन्न विनिर्माण परियोजनाओं में किया जाए, जिससे बारिश में ये गाद बहकर वापस यमुना में ना जाए। एसटीपी, औद्योगिक वेस्टेज और सभी नालों के डिस्चार्ज को अच्छे से मॉनिटर करें। सिर्फ संतोषजनक काम नहीं बल्कि सटीक परिणाम आने चाहिए। यमुना में जुड़ने वाले सभी नालों और जल स्रोतों में शुद्धिकरण के विभिन्न पैमानों, जैसे बीओडी, सीओडी और टीएस की निरंतर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में अब तक 128 एसटीपी बन चुके हैं और 2027 के अंत तक 99 नए एसटीपी और बनाए जाएंगे। औद्योगिक सीईटीपी या डेयरी वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट्स का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही हो। यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना के सभी प्रोजेक्ट्स की विस्तृत कार्ययोजना और निष्पादन तिथि तय हो और इनके दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो। यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना में कार्य प्रगति की हर 20 दिन में समीक्षा होगी।


