Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Hapur News : हापुड़ में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना भी लगाHapur News : हापुड़ के उद्योगपति संजय गुप्ता का होगा राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में मिलेगा ग्लोबल आइकॉन अवार्डLucknow : जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी- सीएम योगीLucknow : पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय- मुख्यमंत्री योगीAyodhya : ‘पुष्पक विमान’ और ‘राम दरबार’ के साथ ही मोहित करेगी रामायण थीमLucknow : बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी योगी सरकार, 67.50 लाख लोगों को हर महीने मिल रही पेंशनAyodhya : 15 फीट ऊँचे रामरथ पर विराजेंगे जगत के पालनहारीAyodhya : रामनगरी के दसवें दीपोत्सव में दिखेगा वैश्विक रामकथा का रंग

उत्तर प्रदेश : श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर उमड़ा आस्था का सैलाब, राधा-कृष्ण संग भक्तों ने खेली अलौकिक होली

Mathura News : बरसाना और नंदगाँव की विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के भव्य आयोजनों के बाद गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में रंग-भरी एकादशी के अवसर पर आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर अबीर, गुलाल और पुष्पों की सुगंध से सराबोर नजर आया। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के साथ होली खेलकर स्वयं को धन्य महसूस किया।

ब्रज की होली का आध्यात्मिक महत्व द्वापर युग से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि होली उत्सव की परंपरा का आरंभ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर चालीस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव रंग-भरी एकादशी पर विशेष रूप से उल्लासपूर्ण हो उठता है। लोक विश्वास के अनुसार बरसाना और नंदगाँव में गोपियों संग होली खेलने के पश्चात भगवान आज ही के दिन मथुरा पधारे थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि रंग-भरी एकादशी पर ठाकुर जी भक्तों के साथ होली खेलते हैं और सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और भव्यता के साथ निभाई जा रही है। इस अवसर पर महादेव की नगरी काशी से भेजे गए अबीर-गुलाल से भी जन्मभूमि परिसर रंगमय हो उठा।

जन्मस्थान स्थित लीला मंच पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव को और भी जीवंत बना दिया। राधा-कृष्ण के स्वरूपों द्वारा मनमोहक रासलीलाओं का मंचन किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। ब्रज के हुरियारे और हुरियारिनों ने पारंपरिक लोकगीतों पर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। ब्रज का प्रसिद्ध मयूर नृत्य और चरकुला नृत्य महोत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे, जिनकी छटा ने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान जैसे ही मंच से राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने भक्तों पर पुष्पवर्षा की, पूरा परिसर जयघोष से गूंज उठा। हुरियारिनों ने प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाकर लठामार होली की परंपरा का प्रतीकात्मक निर्वहन किया। रंग और गुलाल की फुहारों के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात राधा-कृष्ण अपने भक्तों के मध्य विराजमान हों।

श्रद्धालुओं का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर खेली गई यह होली उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बन गई। भक्ति, उल्लास और परंपरा का यह अद्भुत संगम एक बार फिर साबित कर गया कि ब्रज की होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था और प्रेम का जीवंत उत्सव है, जिसकी स्मृतियां श्रद्धालु जीवन भर अपने हृदय में संजोए रखते हैं।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

संबंधित खबरें