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Gautam Buddha University conference: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने साझा किए शोध निष्कर्ष

Gautam Buddha University conference: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने साझा किए शोध निष्कर्ष

नोएडा, 13 फरवरी: Gautam Buddha University में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और उभरती डिजिटल तकनीकों जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए नवाचार, उद्योग-शैक्षणिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक तकनीकें केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, परिवहन और स्मार्ट सिटी जैसी वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शोधार्थियों ने अपने पेपर प्रस्तुत करते हुए बताया कि डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली और एआई आधारित समाधान भविष्य की अर्थव्यवस्था और समाज को नई दिशा दे सकते हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति Rana Pratap Singh ने बताया कि सम्मेलन के लिए 2,300 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए हैं। यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक शोध वैश्विक स्तर पर कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है और विभिन्न देशों के शोधकर्ता साझा मंच पर मिलकर नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

सम्मेलन में INTI International University, मलेशिया के प्रो. वाई यी लियोंग ने वैश्विक शोध रुझानों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-विषयक शोध और वैश्विक नेटवर्किंग अत्यंत आवश्यक है।

इसके अलावा IIIT Allahabad के प्रो. अखिलेश तिवारी, IIT Kanpur के प्रो. निश्चल के. वर्मा, डीन अकादमिक प्रो. राजीव वार्ष्णेय, कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह, जनरल चेयर प्रो. एम.ए. अंसारी, कॉन्फ्रेंस चेयर प्रो. कीर्ति पाल, कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. निधि सिंह और डॉ. इंद्रजीत सिंह सहित कई शिक्षाविद् और शोधकर्ता उपस्थित रहे।

तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों और छात्रों ने भी सक्रिय भागीदारी की और विशेषज्ञों से संवाद कर अपने प्रोजेक्ट्स पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। सम्मेलन के आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के मंच न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक सहयोग को भी मजबूत बनाते हैं।

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संवाददाता

Tirthankar Sarkar

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