Farmers Mahapanchayat: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर 14 सितंबर को किसानों की महापंचायत, 10% प्लॉट और मुआवजे की मांग पर आंदोलन तेज
नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने अब 14 सितंबर को महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है। किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में प्राधिकरण कार्यालय पर चल रहा धरना शनिवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान धरना स्थल पर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। सामूहिक चर्चा के बाद किसानों ने महापंचायत आयोजित कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने का फैसला लिया।
किसान 9 सितंबर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर धरना दे रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में अधिग्रहित जमीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड, आबादी से जुड़े मामलों का निस्तारण, नए कानून के अनुसार 20 प्रतिशत भूखंड और 20 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा शामिल है। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक इन मांगों का समाधान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर शनिवार को विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों और किसानों ने आंदोलन की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। इसके बाद 14 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर बड़ी महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया गया। किसान संगठनों का दावा है कि महापंचायत में बड़ी संख्या में प्रभावित गांवों के किसान हिस्सा लेंगे।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसानों को 10 प्रतिशत आबादी के प्लॉट देने से संबंधित प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड से वर्ष 2024 में पारित हो चुका है। इसके बाद प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन अभी अनुमोदन का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान कराने के लिए किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसानों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान संगठन चाहते हैं कि प्राधिकरण और शासन लंबित मामलों पर जल्द निर्णय लें, जिससे जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को उनका अधिकार मिल सके।
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि इस बार किसान अपनी मांगों को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन को बीच में समाप्त नहीं किया जाएगा और मांगों का समाधान होने तक किसान धरना स्थल पर डटे रहेंगे।
किसान एकता संघ के नेता उम्मेद त्यागी ने 10 प्रतिशत आबादी भूखंड का मामला लंबित रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। उनका कहना है कि किसान संगठन इस मांग का समाधान कराने के लिए संयुक्त रूप से संघर्ष को और मजबूत करेंगे।
भारतीय किसान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष कुमार पाल प्रधान ने कहा कि किसान किसी तरह के दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि किसानों के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि 14 सितंबर की महापंचायत आंदोलन के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होगी। इसमें विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि और प्रभावित गांवों के किसान शामिल होंगे। महापंचायत के दौरान मांगों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के साथ आगे की रणनीति पर सामूहिक फैसला लिया जाएगा।
किसानों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा के विकास के लिए उनकी जमीनों का अधिग्रहण किया गया, इसलिए उनसे जुड़े लंबित आबादी, भूखंड और मुआवजे के मामलों का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। किसान संघर्ष मोर्चा ने मांगों पर ठोस निर्णय होने तक धरना और आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।


