Eco Friendly Ganpati: मथुरा की यमुना की मिट्टी से नोएडा में तैयार हुए गणपति बप्पा, 14 सितंबर को पंडालों में होंगे विराजमान
नोएडा। गणेश उत्सव को लेकर नोएडा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार शहर के घरों, मंदिरों, कॉलोनियों और पंडालों में मथुरा की यमुना नदी की मिट्टी से तैयार ईको फ्रेंडली गणपति बप्पा की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। कोलकाता से आए मूर्तिकार पिछले करीब दो से तीन महीने से अलग-अलग स्वरूपों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं। अब अधिकांश मूर्तियों को अंतिम रूप दे दिया गया है और गणेश चतुर्थी से पहले इनकी डिलीवरी शुरू होने वाली है।
मूर्तिकारों के मुताबिक इस बार 150 से अधिक ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इनमें छोटी प्रतिमाओं से लेकर पांच और दस फीट तक की बड़ी प्रतिमाएं शामिल हैं। करीब 45 प्रतिमाओं को विशेष रूप से बड़े और आकर्षक स्वरूप में तैयार किया गया है। इनकी बुकिंग नोएडा के साथ गाजियाबाद और आसपास के दूसरे जिलों से भी की गई है।
मूर्तिकार कार्तिक ने बताया कि एक गणेश प्रतिमा को मूल आकार देने में करीब पांच दिन लग जाते हैं। इसके बाद उसे सुखाने, रंग-रोगन करने, वेशभूषा तैयार करने और शृंगार करने का काम किया जाता है। पूरी प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होने के कारण बड़ी और विशेष डिजाइन वाली प्रतिमाओं को तैयार करने में करीब एक सप्ताह या उससे अधिक समय भी लग सकता है।
मूर्तिकारों के अनुसार स्थानीय मिट्टी में गंदगी अधिक होने के कारण प्रतिमाओं के निर्माण में उसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके स्थान पर मथुरा की यमुना नदी क्षेत्र से लाई गई मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। प्रतिमाओं को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्राकृतिक सामग्री को प्राथमिकता दी गई है।
ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने की शुरुआत लकड़ी और घास-फूस की मदद से ढांचा तैयार करने से होती है। इसके बाद ढांचे पर मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है। इसमें यमुना की मिट्टी के साथ चिकनी मिट्टी, जौ, भूसा, पूजन सामग्री और दूसरी प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। कई चरणों में प्रतिमा को आकार देने के बाद उसे अच्छी तरह सुखाया जाता है।
प्रतिमा सूखने के बाद रंग करने की प्रक्रिया शुरू होती है। अंतिम चरण में भगवान गणेश की वेशभूषा, आभूषण और अन्य शृंगार सामग्री लगाकर प्रतिमा को आकर्षक स्वरूप दिया जाता है। तैयार प्रतिमाओं की कीमत आकार और डिजाइन के आधार पर करीब 700 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक बताई गई है।
इस बार भगवान गणेश की प्रतिमाओं में कई विशेष थीम भी देखने को मिल रही हैं। मूर्तिकारों ने लालबाग के राजा के स्वरूप के साथ भगवान शिव की गोद में बाल गणेश की प्रतिमा तैयार की है। इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित गणेश स्वरूप और भगवान शिव के अघोरी स्वरूप की थीम पर भी गणपति की प्रतिमाएं बनाई गई हैं।
मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ईको फ्रेंडली प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालुओं में जागरूकता बढ़ी है। लोग ऐसी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनके विसर्जन से पर्यावरण और जल स्रोतों को कम नुकसान हो। यही कारण है कि इस बार नोएडा के अलावा गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं की बुकिंग मिली है।
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इससे एक दिन पहले 13 सितंबर से श्रद्धालु बुक की गई प्रतिमाओं को अपने घरों और पंडालों में ले जाना शुरू करेंगे। गणपति स्थापना को लेकर शहर की विभिन्न सोसाइटियों, कॉलोनियों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। श्रद्धालु गणपति बप्पा के स्वागत के लिए सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं।


